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अंतिम व्यक्ित तक ले जाना होगा विकास

झारखंड में नक्सलवाद और इसका निवारण विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के द्वितीय और समापन सत्र में राज्य के कई आलाधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों, सामाजिक चिंतकों और शिक्षाविदों ने अपने सुझाव दिये और विचार व्यक्त किये। गृह सचिव सुधीर त्रिपाठी ने कहा कि सरकारी कार्यप्रणाली को दुरुस्त कर इस अभियान को सशक्त तरीके से चलाया जा सकता है। सत्ता का विकेंद्रीकरण होने से विकास कार्यो में गति मिलती है। वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह ने कहा कि सरकार की इच्छाशक्ित और समाज को अपनी भूमिका निभानी होगी। गरीबी की कोख से नक्सलवाद का जन्म हुआ है। वरिष्ठ पत्रकार संत शरण अवस्थी ने कहा कि आज सबसे पहले अपनी दृष्टि सुधारनी होगी। गरीबी, कुपोषण और शोषण को दूर कर इस समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है।ड्ढr विकास भारती के सचिव अशोक भगत ने कहा कि आज पुलिस उग्रवाद से अकेले लड़ रही है। साम्यवाद की स्थापना के नाम पर आर्थिक धन बटोरने के लिए संघर्ष हो रहा है, नैतिकता का पतन हो गया है, जिसके कारण ही भ्रष्टाचार चरम पर है। एडीाीपी गौरीशंकर रथ ने कहा कि इस फोरम में नक्सलवाद का समाधान संभव नहीं है। इसे दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। पुलिस महानिरीक्षक प्रोविजन सत्यनारायण प्रधान ने नक्सलवाद पर पुलिस प्रशासन और सरकार की भूमिका पर विस्तृत बातें रखीं। उन्होंने कहा कि आज फ्रंट लाइन पर पुलिस है।ड्ढr फादर बेनी एक्का ने कहा कि आदिवासी कभी भी मुख्यधारा से हटना नहीं चाहते, उन्हें दिग्भ्रमित कर दिया जाता है। जब व्यवस्था में आम लोगों की पीड़ा सुनी जायेगी, तो स्वत: नक्सलवाद समाप्त हो जायेगा।ड्ढr विनोबा भावे विवि के कुलपति डॉ एमपी सिंह ने उन गंभीर सवालों को रखांकित करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थाओं को भी अपनी जिम्मेवारी निभानी होगी। एसपी प्रवीण कुमार ने परिचर्चा में उठे सवालों और समाधान के लिए दिये गये उपायों पर अतिथियों से सवाल किया कि क्या व्यवस्था को पारदर्शिता बनाये रखने के लिए सिर्फ पुलिस की भूमिका अहम है या इसमें व्यवस्था के सभी अंगों को ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इस परिचर्चा में कई ऐसी बातें छन कर आयी है जिससे इस अभियान को नयी राह मिलेगी। संचालन सुकल्याण मोइत्रा और मनोज सिन्हा ने किया।ड्ढr ं

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