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पीएम ने काम-काज के आधार पर समर्थन मांगा

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सिख-पंथ के दसवें गुरू गोविन्द सिंह की मशहूर उक्ित, शुभ कर्मन ते कबहूं न डरो, के आवाह्न के साथ सोमवार को फिर भारत-अमरीका परमाणु करार के अमल की दिशा में अपनी सरकार के कदमों का बचाव किया। उन्होंने लोकसभा से केवल इस करार नही, बल्कि करीब चार वषर्ो के सकल कायर्ो के आधार पर सरकार को विश्वास मत देने की अपील की। डॉ. सिंह ने चारो वामदलों की आेर से समर्थन वापसी के बाद बुलाए गए संसद के दो दिन के विशेष सत्र में एक पंक्ित का विश्वास मत प्रस्ताव रखते हुए सदस्यों से उक्त अपील की। यह प्रस्ताव कि यह सभा मंत्रिपरिषद में अपना विश्वास व्यक्त करती है, सदन के विचारार्थ रखते हुए प्रधानमंत्री ने वामपंथी पार्टियों पर हमला बोला और कहा कि इन दलों ने ऐसे समय सरकार से समर्थन वापस लिया है जब कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार लोगों को मुद्रास्फीति एवं महंगाई से निजात दिलाने के आर्थिक एवं वित्तीय कदम उठाने में जुटी थी तथा जनहित के कार्यक्रमों पर अमल की गति तेज कर रही थी। उन्होंने संप्रग सरकार के निर्माताआें के नामोल्लेख के दौरान यह सावधानी भी बरती कि माक्र्ससवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्धन तथा समर्थन वापसी के लिए जिम्मेदार अन्य प्रमुख वाम नेताआें को सरकार के गठन एवं उसे सवा चार साल तक चलाने का श्रेय न मिले। डॉ. सिंह ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री योतिबसु, माकपा के पूर्व महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत तथा द्रविड मुनेत्र कड़गम के अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करूणानिधि को संप्रग सरकार के गठन की चालक शक्ित बताया और वर्तमान वाम नेतृत्व का नामोल्लेख किए बिना कहा कि इन दलों ने तब समर्थन वापस लिया जब वह विकसित देशों के समूह जी-आठ की शिखर बैठक में भाग लेने के लिए जापान गए हुए थे। प्रधानमंत्री ने समर्थन वापसी के फैसले को जनता की राहत के लिए सरकार के प्रयासों में बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि इस स्थिति को टाला जा सकता था। खास कर तब जब उनकी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) बोर्ड से भारत केन्द्रित परमाणु सुरक्षा उपायों पर मंजूरी लेने परमाणु ईधन की आपूर्ति की खातिर आपूर्तिकर्ता राष्ट्रों के समूह (एनएसजी) से नियमों में आवश्यक छूट हासिल करने तथा करार पर अमेरिकी कांग्रेस के अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इस करार पर अमल से पहले संसद की भावना लेने का स्पष्ट वादा किया था। उन्होंने सदस्यों से संप्रग सरकार के हर नीतिगत निर्णय को देशहित की कसौटी पर कसने तथा सरकार के अब तक के तमाम कायर्ो की समीक्षा करने की अपील की और भरोसा जताया कि ऐसा करने पर सदस्यगण सबसे देशभक्त पार्टी कांग्रेस की अगुवाई वाली संप्रग सरकार में भरोसा अवश्य जताएंगे। उन्होंने इस संक्षिप्त वक्तव्य एवं सिख पंथ के अंतिम गुरू गोविंद सिंह के मशहूर प्रार्थना गीत, शुभ कर्मम ते कबहूं न डरो, के पंजाबी पाठ के साथ विश्वास मत प्रस्ताव पर सभी दलों एवं सदस्यों से समर्थन की अपील की। गौरतलब है कि मनमोहन सरकार के कार्यकाल के दौरान पहली बार विश्वास मत की नौबत आई है।

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