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चटखारी चर्चा में रही लीडरों की डील

पुराने शहर केोलभराव वाले इलाके हों या फिर शासन चलाने की फिक्र में फाइलों सेोूझने वाले सचिवालय के अफसरों का कमरा, सोमवार को यहाँ अपनी मुश्किलों की परवाह कम ही थी। मुद्दा तो बस एक ही छाया था कि केन्द्र सरकार बचेगी या गिरगी? टीवी से चिपकी आँखें और साथ में अपनी-अपनी स्पेशल कमेंट्स। धरना स्थल पर अपनी माँगों को लेकर बैठने वालों की भी आा नारबााी में कम और दिल्ली की खबरोानने में दिलचस्पी यादा थी। ऐसा लग रहा था कि वन डे क्रिकेट का कोई मैच चल रहा हो। आडवाणी ने क्या कहा, लालू ने किसको कैसे घेर में लिया..वाम का क्या होगा? मायावती भी तो पीएम बन सकती हैं तब तो सीबीआईोाँचोरूर चलेगी..ौसी बातें पूर दिन लोगों की बहस का चर्चा बनी रहीं।ड्ढr लोग-बाग संसद में भाषण देते सांसदों की खूब खिल्ली भी उड़ाते रहे। कोई कह रहा था..अर देखो-देखो ये चला रहे हैं देश। अभी तो यह बोल रहे हैं कलोाएँगे वोट किसी और को देंगे..इस वाक्य के पूरा होते-होते कमर में ठहाके गूँाने लगे।ड्ढr ओहदेदारों से लेकर चाय-पान की दुकान तक बहस-मुबाहिसों का दौर चला। कहीं गंभीर चर्चा थी, तो कहीं सांसदों की ‘बिकवाली’ पर ठिठोली। अपवाद थे तो मल्टीप्लेक्स परिसर व उसके रस्तराओं में मौाूद युवाोोड़े। उनमें राानीतिक हलचल के प्रति बेफिक्री थी। वहाँ के प्लामा टीवी की स्क्रीन पर ‘एमटीवी’ व ‘वी’ चैनल ही चल रहे थे। दारुलशफा में कुछ व्यापारी सरकार गिरने और फिर मायावती के प्रधानमंत्री बनने के लिए यज्ञ करने मेंोुटे थे।ड्ढr शनिवार, इतवार की छुट्टी के बाद सोमवार को दफ्तर खुले थे। ऐसे में अमूमन दफ्तरों में यादा फरियादी होते हैं, मगर आा अपेक्षाकृत कम लोग थे।ड्ढr सचिवालय केोिन कक्षों में टीवी लगा है वहाँ भीड़ यादा थी।ोो बगैर टीवी वाले कमर थे वहाँ बैठने वाले आनेवालों से दिल्ली की खबर ले रहे थे। यहाँ क्या हो रहा है? इस सवाल की सीधाोवाब दियाोा रहा था-आा सब दिल्ली में हो रहा। यहाँ कुछ नहीं।ड्ढr यह मुद्दा रााधानी पर कल किस तरह हावी रहा इसका अंदा इसी बात से लगायाोा सकता है कि गोमतीनगर के विवेकखण्ड में एक सैलून में शुरू हुई बहस में दोनों पक्ष इस कदर भिड़े कि नौबत मारपीट तक पहुँच गई। बाद में सैलून वाले ने दोनों पक्षों को चाय पिलाकर मामला निपटाया।ड्ढr दरअसल, ‘कोऊ नृप होय हमें का हानि’ ौसी मशहूर लाइन आउटडेटेड प्रतीत हो रही थीं। लोगों की निगाहें टेलीविान स्क्रीन से चिपकी रहीं। राानेताओं के बयानों को चटखार लेकर सुना और सुनायाोाता रहा। आडवाणी के भाषण से लेकर रलमंत्री लालू प्रसाद का चुटीला अंदाा। लखनऊ में सोमवार का दिन संसद की गतिविधियों की पल-पल की खबरों और दृश्यों में ही डूबता-उतराता रहा।

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