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रिजल्ट आज रात

बाहर नम्बर गेम की उत्सुकता और अंदर सरगर्मी के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को लोकसभा में विश्वास मत प्रस्ताव पेश किया। गुरु गोविंद सिंहोी के पदों के उद्धरण के साथ उन्होंने ओापूर्ण मुद्रा में सदन का समर्थन माँगा तोोवाम में विपक्ष के नेताओं ने भीोम कर तीखे प्रहार किए। दिनभर चली बहस के दौरान कई बार उत्तेना के क्षण भी आए। एक बार तो स्थिति इतनी बिगड़ गई कि लालू यादव ललकारने लगे कि ‘महाभारत यहीं होोाएगा’। राम गोपाल यादव के भाषण के समय भी कमोबेश यही स्थिति उत्पन्न हो गई।ड्ढr पीएम ने अपनी सरकार की चार साल की उपलब्धियों काोिक्र किया। अमेरिका के साथ परमाणु करार को देश के लिएोरूरी बताया। वाम दलों को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा कि एसे वक्त सरकार से समर्थन वापस लिया गया,ोब वह महँगाई से आम आदमी को निाात दिलाने की कोशिश मेंोुटी थी। साथ ही वहोापान गए हुए थे। मनमोहन ने वाम नेताओं- योति बसु और हरकिशन सिंह सुराीत को सराहा और उन्हें बुद्धिमान बताया। उन्होंने अपनी सरकार के कामकाा के आधार पर सांसदों से विश्वास मत प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की।ड्ढr इसके बाद बारी विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी की थी। उन्होंने केन्द्र सरकार को मरणासन्न बताया। कहा कि पीएम सरकार बचाने के लिए हर हथकंडा अपना रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिलेगी। आडवाणी बोले, ‘विदेश मंत्री कहते हैं बिना संसद की मांूरी के हम आईएईए या एनएसाी में नहींोाएँगे, लेकिन चंद घंटों में ही वह पलटोाते हैं।’ उन्होंने कहा कि एसा लगता है ौसे परमाणु करार दो देशों के बीच न होकर दो लोगों में हो रहा है।ड्ढr आडवाणी के हमले काोवाब देते हुए सरकार की ओर से विदेश मंत्री प्रणव मुखर्ाी ने कहा कि यह करार देशहित में है और इससे 2050 तक दो लाख मेगावाट बिाली मिलेगी। प्रणव ने कहा कि सरकार ने वाम दलों से कुछ भी नहीं छिपाया और करार के बार में उन्हें पूरीोानकारी दी। प्रणव की इस दलील पर विपक्ष की ओर से माकपा के मोहम्मद सलीम ने कमान संभाली। सलीम ने सरकार को अमेरिका परस्त बताया। इसके बाद सरकार का साथ देने की घोषणा करते हुए सपा नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि एक व्यक्ित के अहम की तुष्टी के लिए ही वाम दल और अन्य पार्टियाँ सरकार को गिराने की कोशिश कर रही हैं। उनके इस बयान पर हंगामा मच गया। अध्यक्ष सोमनाथ चटर्ाी ने हंगामा शांत न होते देखकर सदन की बैठक पौने चार बो तक स्थगित कर दी। बाद में भी कई वक्ताओं के भाषण के दौरान हंगामे की स्थिति बनी। सोमनाथ चटर्ाी बार-बार खड़े होकर सदन में व्यवस्था बनाते दिखे। एक बार तो खीझकर उन्होंने यह तक कहा, ‘मैं किसी का गला तो नहीं दबा सकता।’ड्ढr वहीं, अकाली दल के सांसद बोले कि प्रधानमंत्री ने तो सिखों के लिए कुछ किया ही नहीं, फिर उन्हें समर्थन कैसे दे सकते हैं।

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