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राजधानी में एक इंच भी नहीं घटा पानी

राजेन्द्रनगर और कंकड़बाग समेत तमाम इलाकों के जलकैदियों की परशानी सोमवार को भी नहीं कमी। नगर निगम के लाख प्रयास के बावजूद किसी भी मुहल्ले में एक इंच भी पानी नहीं घटा है। स्थिति बिगड़ती जा रही है। हालांकि सैदपुर और योगीपुर संप हाउस पर पानी का दबाव कुछ कम हुआ है। संप का मशीन बंद होते ही चेंबर में पानी बढ़ जाता है। सैदपुर संप हाउस की जर्जर मशीने पानी निकालने में हांफ रही हैं। अगर यही स्थिति रही तो अभी एक सप्ताह और राजेन्द्रनगर में कमर तक पानी जमा रहेगा। दूसरी ओर राजेन्द्रनगर के निवासियों को अब यह चिंता सताने लगी है कि कहीं पूर बरसात इस स्थिति का सामना करना पड़े। मुहल्लों में पानी नहीं घटने की वजह से लोगों की परशानी बढ़ती जा रही है। कूड़े-कचर और मलमूत्र तैर रहे हैं। पानी काला पड़ गया है। पानी की सड़न से लोगों की तबियत खराब होनी शुरू हो गई है। सैदपुर संप पर रविवार की रात 11 बजे पहुंचे तीन पंप को सोमवार की शाम तक चालू नहीं किया गया है। कंकड़बाग की स्थिति भी नारकीय है। शालीमार से लेकर योगीपुर संप तक सड़क पर पानी जमा है। कंकड़बाग के पूर इलाके में भीषण जलजमाव है। इन्ही दो इलाकों में नगर निगम का ध्यान केंद्रित हो कर रह गया है। श्रीकृष्णानगर, पुनाईचक, गर्दनीबाग, पोस्टल पार्क व शास्त्रीनगर आदि मुहल्लों में कोई देखने भी नहीं जा रहा है। ब्लीचिंग-चूना का छिड़काव तो हाथ पर सूर्य लेकर खोजने से भी नहीं दिखाई पड़ेगा। नगर आयुक्त मिहिर कुमार सिंह के मुताबिक प्रकृति की मर्जी के आगे नगर निगम एक नहीं चल रही है। जितना पानी निकाला जा रहा है उससे अधिक बारिश के कारण भर जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक एमएल बारिश हो चुकी है जो सालाना औसत बारिश का लगभग 80 फीसदी है।ड्ढr ड्ढr सैदपुर परिसर में 40 शिक्षक परिवार जलकैदीड्ढr पटना (हि.प्र.)। पटना विश्वविद्यालय के सैदपुर कैम्पस में करीब 40 शिक्षक परिवार पिछले एक सप्ताह से जलकैदी बने हुए हैं लेकिन इसकी परवाह न तो विश्वविद्यालय प्रशासन, न ही पटना नगर निगम को है। खासकर बैचलर शिक्षक क्वार्टर के पास तो स्थिति काफी भयावह है। एक तालाब में मछली पालन को लेकर इस क्षेत्र में जलजमाव की और बदतर है। परिसर में सभी शिक्षक क्वार्टर में पानी घुस गया है और शिक्षकों का सारा दिनचर्या बंद है। निचले तल्ले में जलजमाव के कारण कई शिक्षक छतों के ऊपर शरण लिए हुए है। वर्षा कम होने पर पानी थ ोड़ा निकलता है लेकिन फिर बारिश शुरू होने पर जल का स्तर बढ़ जाता है। शिक्षकों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण ही परिसर में यह स्थिति बनी हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक साजिश की तहत परिसर में स्थित तालाब को मछली पालन के लिए दे दिया है। अब मछलीपालक तालाब के किनार से पानी बाहर नहीं छोड़ना चोहता है जिससे पूर इलाके में जलजमाव है। दरअसल सैदपुर परिसर का शिक्षक क्वार्टर वर्षो से जर्जर स्थिति में है और विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से कोई स्थायी मरम्मती का कार्य पूरा नहीं किया गया है। खासकर बैचलर क्वार्टर की स्थिति इतनी भयावह है कि क्वार्टर में कभी भी कोई हादसा हो सकता है। रानीघाट शिक्षक व कर्मचारी क्वार्टर में जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। जलनिकासी में कोताही महंगी पड़ेगी : डीएमड्ढr पटना (का.सं.)। जल निकासी में किसी प्रकार की कोताही महंगी पड़ सकती है, अधिकारियों और कर्मचारियों को। डय़ूटी से गायब रहने पदाधिकारियों और कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई होगी। यह जानकारी जिलाधिकारी जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने दी। वे सोमवार को स्थानीय समाहरणालय सभागार में जल निकासी के लिए सम्प हाऊसों पर तैनात दंडाधिकारियों और तकनीकी पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में दोषी पदाधिकारियों को नहीं बख्शा जाएगा। श्री सिन्हा ने संप हाऊसों पर किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न होने पर तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष को इसकी सूचना देने का निर्देश दिया। डीएम ने जिला नियंत्रण कक्ष के प्रभारी दंडाधिकारी को नावों के परिचालन में तेजी लाने और इस कार्य की निगरानी करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि जल जमाव वाले इलाकों की स्थिति काफी गंभीर है, इसलिए इस कार्य को पूरी मुस्तैदी से निपटाया जाना चाहिए। जिलाधिकारी ने जल जमाव से प्रभावित इलाकों के लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के निराकरण का निर्देश दिया, ताकि राजधानी के कंकड़बाग और राजेन्द्र नगर समेत अन्य इलाकों के लोगों को इस त्रासदी से जल्द से जल्द मुक्ित दिलायी जा सके। बैठक में विधायक अरुण कुमार सिन्हा, नितिन नवीन, डीडीसी राजीव कुमार सिंह समेत जिला प्रशासन द्वारा प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों तथा पटना नगर निगम और बिहार राज्य जल पर्षद के पदाधिकारी मौजूद थे।ं

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