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मनमोहन सरकार ने विश्वास मत जीता

परमाणु करार पर दो दिनों की चर्चा के बाद हुई वोटिंग में मनमोहन सिंह सरकार ने विश्वास प्रस्ताव जीत लिया है। सरकार के पक्ष में जहां 275 वोट मिले, वहीं सरकार के विरोध में 256 वोट पड़े। कुल 531 सदस्यों ने मतदान किया। प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह सरकार द्वारा आज रात लोकसभा से विश्वास मत हासिल कर लिए जाने के साथ ही देश के राजनीतिक और संसदीय इतिहास में एक नया रोमांचक अध्याय जुड़ गया। डा सिंह सरकार पर संकट की घडी में यह उपलब्धि अपने नाम लिखवाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री बन गए है। देश के अब तक के संसदीय इतिहास में पांच प्रधानमंत्रियों ने अपनी सरकार पर छाए संकट के समय हासिल करने का प्रयास किया और पांचों ही उसमें असफल रहे। वे प्रधानमंत्री थे- मोरारजी देसाई, चरण सिंह, विश्वनाथ सिंह, एच डी देवेगौड़ा और अटल बिहारी वाजपेयी। इनमें से मोरार जी देसाई ने स्थिति को भांपकर सदन में विश्वास मत के प्रस्ताव पर मतदान से पहले ही इस्तीफा दे दिया था। उनके बाद प्रधानमंत्री बने चरण सिंह को लोकसभा का विश्वास हासिल करना था लेकिन वह सदन का सामना ही नहीं कर सके। विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार कांग्रेस और भाजपा द्वारा विरोध में मतदान के फलस्वरुप सदन में विश्वास मत के प्रस्ताव पर हार गई थी। देवेगौड़ा ने कांग्रेस का समर्थन नहीं मिलने के कारण विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान से पहले ही त्यागपत्र दे दिया था। अटल बिहारी वाजपेयी 1में सदन में मतदान से पहले ही अपनी 13 दिन की सरकार का इस्तीफा देने पर विवश हो गए थे जबकि 1में उनकी सरकार विश्वास मत का प्रस्ताव एक वोट से हार गई थी। वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को विश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देने नहीं दिया गया। जब प्रधानमंत्री जवाब देने के लिए खड़े हुए तभी विपक्ष के सभी सदस्य खड़े हो गए और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करने लगे। कुछ सदस्य स्पीकर की कुर्सी के पास आकर नारेबाजी करने लगे। इससे पहले सदन में आज एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला जब भारतीय जनता पार्टी के एक सांसद अशोक अर्गल ने यह आरोप लगाया कि उन्हें तथा दो अन्य भाजपा सांसद को सत्ता पक्ष की तरफ से मतदान के समय अनुपस्थित रहने के लिए रोड़ का ऑफर दिया गया था। इसके बाद सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ और सदन को लगभग एक घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा। उसके बाद सदन की कार्रवाई जब शुरू हुई तो स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने सदस्यों को भरोसा दिया कि इस मामले की जांच की जाएगी और दोषियों को सजा दी जाएगी। उसके बाद सदन की कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा।

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  • Web Title: मनमोहन की जीत ने रचा नया इतिहास