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शराब-सिगरट ही पहचान बनी

सव्रे के मुताबिक छात्रावास के1से 26 वर्ष की उम्र के छात्रों में से औसतन 10 में से 8 शराबखोर हैं। पुन: पिछले 7-8 वर्षो में छात्रावासों में शराबियों का औसत 60 फीसदी बढ़ा है। ये वही युवा हैं, जिन पर हमारा देश इतराता है और ये वही छात्रावास हैं, जहां युवाओं का चरित्र निर्माण होता है। सिगरट या तंबाकू व्यक्ितगत बुराई है, पर शराब सामाजिक बुराई है, जिसका गंभीर सामाजिक प्रभाव पड़ता है। काश आज नेहरू जी जिंदा होते तो हम लोग उनसे एक बार फिर पूछते- चाचा! ‘अब भारत किधर?’ड्ढr विनोद कुमार शुक्ला, नेहरू विहारड्ढr सराहनीय कदमड्ढr राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए वन डे और ट्वेंटी-20 के कप्तान एम. एस. धोनी का नाम ोजना बीसीसीआई का सराहनीय कदम है। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले जसे अन्य खिलाड़ी भी इसके प्रबल दावेदार हैं।ड्ढr संतोष कुमार रॉय, जामिया, नई दिल्लीड्ढr कार्रवाई की सीमाएंड्ढr अफगानिस्तान में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों (उच्चायोग के) पर हमला कर अनेक लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। आतंकवादी इस घटना में पाक का हाथ बताते हुए विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने इसे आईएसआई की करतूत बताया। सिर्फ मेनन जी ने ही नहीं बल्कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति कराई ने भी इस आतंकी घटना को पाक की करतूत बताया है। दूसर देश में जाकर हमला करना भी इतना सरल नहीं किंतु कोई तो बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा। भारत बांग्लादेश युद्ध में यह साफ कर चुका है कि यदि वह कुछ करने की ठान ले तो कुछ कठिन नहीं है।ड्ढr इन्द्र सिंह धिगान, किंगवे कैम्प, दिल्लीड्ढr थोड़ा रचनात्मक भी सोचेंड्ढr जब से केन्द्र सरकार ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौता करने का मन बनाया है तभी से वामपंथी दल, भाजपा व अन्य समझौता विरोधी दल इसका विरोध करते आए हैं। विरोध करना उचित है या अनुचित यह तो उनकी अपनी समझ है। अगर समझौता न हो तो हमार ऊरा सुरक्षा हेतु वे विकल्प क्यों नहीं बताते हैं। ऐसे सभी राजनीतिक दलों से मेरा नम्र निवेदन है कि वे ऐसी ओछी हरकतों से बाज आएं और अपनी राजनीति सेंकने हेतु निर्दोष व सरल जनता को बेवकूफ न बनाएं।ड्ढr पवन कुमार, गांधी विहार, नई दिल्लीड्ढr उल्टे दलड्ढr वाम दल (लेफ्ट-दल) जिसका अर्थ है उल्टा दल, ये वास्तव में उल्टे ही हैं। चाहे किसी भी दल से ये गठाोड़ करं, पर सदा विरोध ही करते रहेंगे। सत्ता का सुख भी प्राप्त करते हैं और विरोध भी खूब करते हैं। जहां देखी तवा परात, वहां बिताई सारी रात, जहां सत्ता सुख मिले वहां गठाोड़ हम करं।ड्ढr हेमलता शर्मा, त्रिनगर, दिल्लीड्ढr प्रोफेशनल जनसेवकड्ढr यूपीए सरकार के विश्वास मत प्रस्ताव को लेकर पिछले कुछ दिनों में जो कुछ भी देखने को मिला, वह दिखाता है कि जनसेवक कितने प्रोफेशनल हो गए हैं। खुलेआम हो रहे इस मोलभाव से नई पीढ़ी क्या आदर्श ग्रहण करगी?ड्ढr विजय भास्कर, सेक्टर 71, मोहालीड्ढr ं

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