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भारत ने अमेरिकी प्रस्ताव ठुकराया

औद्योगिक उत्पादों की तरह ही कृषि व्यापार समझौते को लेकर भारत और अमेरिका जसे विकसित देशों के बीच गतिरोध अभी भी बरकरार है। द्विपक्षीय टकराव दो स्तरों पर हैं। पहला कृषि सब्सिडी और दूसरा घरलू कृषि क्षेत्र को संरक्षण। इस समय जिनीवा में चल रहे डब्ल्यूटीओ मिनी-मिनीस्टीरियल के दौरान भारत ने कृषि सब्सिडी घटाने संबंधी अमेरिका के ताजे प्रस्ताव को नामंजूर करते हुये कहा है कि इस मामले में दिखावा करने के बजाय अमेरिका को जिम्मेदार डब्ल्यूटीओ सदस्य की भूमिका का निर्वाह करना चाहिये ताकि दोहा वार्ताओं को सफल बनाया जा सके। वहीं दूसरी ओर भारत ने अन्य विकासशील देशों के साथ मिलकर इस बात का भी दबाव बनाया है कि घरलू उपभोक्ताओं और किसानों के संरक्षण के लिए विकासशील देशों की सरकारों की संप्रभु अधिकारों को सीमित करने के दांवपेंच को भूल स्वस्थ मानसिकता से कदम उठाने की जरूरत है।ड्ढr भारत ने कहा है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के विकसित देशों को यह नहीं भूलना चाहिये कि भारत जसे देशों में कृषि आय से कहीं अधिक करोड़ो गरीब किसानों के लिए महा जीविकोपार्जन का जरिया भर है। यही नहीं, विशाल आबादी वाले देश में खाद्यान्न उपभोग की जरूरतों को भी उतना ही तवज्जो दिये जाने की जरूरत है। लिहाजा, उसे किसानों और खाद्यान्न सुरक्षा के नीतिगत मसलों पर पूरी स्वतंत्रता जारी रखी जाये। जिनीवा वार्ताओं में सक्रिय भूमिका अदा कर रहे वाणिज्य सचिव जी.के.पिल्लई के मुताबिक अमेरिका को पहले के प्रावधानों के मुताबिक अधिकतम 48 अरब डॉलर की सब्सिडी देने की छूट मिली हुई है लेकिन इसमें दी जा रही कृषि व्यापार संबंधी सब्सिडी सात अरब डॉलर है जबकि अमेरिका अभी भी इसे 15 अरब डॉलर रखने की बात कर रहा है। इसे मंजूर नहीं किया जा सकता है। पिल्लई ने कहा है कि भारत अपने नीतिगत अधिकारों को कम करने के लिए किसी भी सूरत में तैयार नहीं है। लिहाजा समझौते के तहत कृषि क्षेत्र के विशेष उत्पादों और विशेष सुरक्षा उपायों संबंधी प्रस्ताव बने रहेंगे और वार्ताओं को सफल बनाने के लिए इनका समझौते में शामिल किया जाना अनिवार्य है। ड्ढr

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