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नेताओं की ‘डील’ की चर्चा थी हर जुबां पर

बाप र बाप.. एतना ‘माल’ का लेन-देन हो रहा है जी। करोड़ों रुपया! साफ देखा दिया..। बोलिये मिश्रा जी, अब का बोलते हैं, देख लिए न कि सरकार के ऊपर में कैसे-कैसे खेल होते हैं। अब मिश्रा जी बोले- अर इ सब नाटक है.. आाप नहीं जानते हैं..रात तक देखिये न सब क्लीयर हो जायेगा। नेपाल हाउस सचिवालय के पवन पान दुकान पर दो अधिकारीनुमा लोगों के बीच ऐसी ही चर्चा लंबी बहस का रूप ले रही थी। वहीं बगल में खड़ी दूसरी टोली भी नेताओं की डील पर चटखार भर रही थी।ड्ढr मंगलवार को राजधानी दिनभर संसद की गतिविधियों की पल-पल की खबरों और दृश्यों में ही डूबता-उतराता रहा। क्या सचिवालय और क्या पान दुकान नेताओं की डील पर खूब चर्चा हुई। केन्द्र सरकार बचेगी या गिरगी? इसपर टीवी से चिपके लोग और साथ में स्पेशल कमेंट्स। चैनल बदल-बदल कर सरकार के पक्ष और विपक्ष में सांसदों के आंकड़ों का हालचाल ऐसे लिया जा रहा था, जसे देश में कोई क्रिकेट मैच चल रहा हो। दोपहर में जसे ही भाजपा के सांसद ने नोटों के बंडल संसद में रखे। माने सचिवालय में अफरा-तफरी मच गयी। जिन जगहों पर टीबी सेट लगे थे, वहां लोग भागे। जो नहीं जा सके, वे फोन पर तुरंत अपने परिचितों को फोन कर संसद का हाल जानने में जुट गये। कई अधिकारी तो. फाइलों को चपरासी को सौंप सीधे घर की ओर हो लिये। सचिवालय में हालचाल यह था, तो अन्य कार्यालयों में भी यही स्थिति थी। घरों में तो मिनी संसद का माहौल था। लोग टीवी सेटों पर चिपके. स्पेशल कमेंट्स दे रहे थे। कोई कह रहा था कि सरकार बच जायेगी, तो कोई अब भी गिरने की बात कह रहा था। अपने-अपने हिसाब से मतों की गणना भी कर रहे थे। शाम में तो भारत-पाक क्रि केट के अंतिम ओवर जसा दृश्य हो गया। इलेक्ट्रॉनिक्स वोटिंग के बाद यूपीए की जीत का अंतर और फिर पर्ची से हो रहे मतदान के दौरान तो लोगों की सांसें रुकी रही।

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