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भिखारियों को स्वरोचागार से जोड़ने की तैयारी

सरकार ने भिक्षावृति को समाप्त करने का मन बना लिया है । इसके लिए कई तरह की तरकीबें सोची जा रही हैं। सबसे पहले भिक्षाटन के खिलाफ बने कानून को और अधिक प्रभावी बनाने पर विचार चल रहा है ताकि चिह्न्ति लोगों को इस वृति से मुक्त कराने के बाद नये लोग इसे न अपना सकें। आमजन से भी अपील की जायेगी को वे बढ़ती जा रही इस प्रवृति पर रोक लगाने में सरकार की मदद करं। ‘दान सद्पात्र को ही देना चाहिए’ इसे प्रचारित करने के लिए सभी धर्मो के संगठनों से भी बात की जा सकती है। सरकार का मानना है कि भिखारियों को भिक्षा देने से भिक्षाटन में लगे लोगों के अंदर की स्किल मारी जाती है जिसका उपयोग कर वे अपने पूर परिवार का भरण पोषण कर सकते हैं।ड्ढr ड्ढr सरकार उनकी पहचान कर उन्हें स्वरोगार में लगाने में भी जुटी है। इसके लिए पहले चरण में राजधानी पटना का चयन किया गया है। राजधानी के भिखारियों के सव्रे का काम अंतिम चरण में है। सव्रे के बाद सरकार उनकी क्षमता के अनुसार ऐसे काम में लगायेगी जिसकी आमदनी से वे अपना पेट भर सकें। लाचार और अपंग लोगों के लिए सरकार अलग से ‘आश्रम’ की व्यवस्था होगी। वहां उन्हें बेहतर जीवन जीने के लिए हर सुविधा दी जायेगी। समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव विजय प्रकाश ने बताया कि अधिसंख्य भिखारी ऐसे हैं जो कोई उद्यम कर अपना पेट आसानी से भर सकते हैं। भीख मांगने के लिए जिस कला का वे उपयोग करते हैं उन्हें पता नहीं कि वे उस कला का उपयोग कर अच्छे सेल्स मैन हो सकते हैं। उनके अंदर की प्रतिभा को उभार कर इसके अलावे भी कई अन्य काम में उन्हें लगाया जा सकता है।

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