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रार पर भारी पड़ा एटमी करार

वाजपेयी ने लॉबी से की वोटिंग सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोप-प्रत्यारोप के बीच संप्रग सरकार ने मंगलवार को लोकसभा का विश्वास हासिल कर लिया। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह द्वारा पेश विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 275 और खिलाफ में 256 वोट पड़े। 11 सांसदों ने मतदान में भाग नहीं लिया। वोटिंग से पहले दो दिन तक चली गर्मागर्म बहस का जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री जसे ही खड़े हुए विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया और लाख कोशिश के बावजूद उन्हें बोलने नहीं दिया गया। विपक्षी सांसद वेल में आकर प्रधानमंत्री के खिलाफ नारबाजी करने लगे। वे प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि बहुमत जुटाने के लिए सार नियमों-कानूनों को ताक पर रख कर मनमोहन सिंह ने सांसदों की खरीद-फरोख्त की है। भाजपा के तीन सांसदों को सदन से गैरहाजिर रहने के लिए तीन-तीन करोड़ की पेशकश के खुलासे से विपक्षी सदस्य काफी गुस्से में थे। स्पीकर के बार-बार के आग्रह का भी सदस्यों पर असर नहीं पड़ा। बेवश प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की कॉपी लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी।ड्ढr इसके बाद स्पीकर ने वोटिंग कराने की घोषणा की। ध्वनिमत पर विपक्ष द्वारा आपत्ति करने के बाद स्पीकर ने डिविजन कराने के निर्देश दिये। वोटिंग के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी पहुंचे। वाजपेयी समेत भाजपा के चार बीमार सांसदों ने लोकसभा की लॉबी से मतदान किये। गौरतलब है कि सोमवार को प्रधानमंत्री ने सदन में अपने मंत्रिपरिषद के प्रति विश्वास का प्रस्ताव पेश किया था। उन्होंने परमाणु करार के अमल की दिशा में सरकार के कदमों की वकालत करते हुए सदस्यों से केवल करार नहीं, बल्कि करीब चार वर्षों के कार्यों के आधार पर सरकार को विश्वास मत देने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने वामपंथी पार्टियों पर हमला बोलते हुए कहा था कि इन दलों ने ऐसे समय सरकार से समर्थन वापस लिया है जब सरकार लोगों को महंगाई से निजात दिलाने के आर्थिक एवं वित्तीय कदम उठाने में जुटी थी तथा जनहित के कार्यक्रमों पर अमल की गति तेज कर रही थी। प्रधानमंत्री ने समर्थन वापसी के फैसले को जनता की राहत के लिए सरकार के प्रयासों में बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि इस स्थिति को टाला जा सकता था। खास कर तब जब उनकी सरकार ने आईएईए बोर्ड से भारत केन्द्रित परमाणु सुरक्षा उपायों पर मंजूरी लेने, एनएसजी से नियमों में आवश्यक छूट हासिल करने तथा करार पर अमेरिकी कांग्रेस के अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद करार पर अमल से पहले संसद की भावना लेने का स्पष्ट वादा किया था। विकास के लिए ऊरा जरूरी: राहुलड्ढr नई दिल्ली (एजेंसियां)। संसद मं विश्वास मत प्रस्ताव का समर्थन करत हुए कांग्रस महासचिव राहुल गांधी न कहा कि दश क विकास क लिए ऊर्जा जरूरी है। उन्हांन कहा कि गरीबी का सीधा संबंध ऊर्जा स है और जब तक ऊर्जा क क्षत्र मं दश आत्मनिर्भर नहीं बनता विकास की बात बमानी है। राहुल गांधी न कहा कि बिजली नहीं हान क कारण ही दश मं गरीबां और अमीरां क बीच खाई बढ़ती जा रही है। उन्हांन कहा कि गरीबां का आत्मनिर्भर बनान और गरीबी मिटान क लिए ऊर्जा आवश्यक है। विदर्भ मं रह रही गरीब महिलाआं का उदाहरण दत हुए कांग्रस सांसद न कहा कि बिजली आन स गरीबां का शिक्षा मिल सकगी और उनकी कमाई क स्त्रात भी बढ़ंग। जिसस दश क विकास का एक नया आयाम मिलगा।ड्ढr उन्हांन कहा कि ऊर्जा सुरक्षा का यदि हम नजरअंदाज करंग ता आन वाल दिनां मं दश का विकास बुरी तरह प्रभावित हागा और तरक्की की दौड़ मं भारत पीछ रह जाएगा। दश की तरक्की क लिए एटमी ऊर्जा की आवश्यकता पर बल दत हुए राहुल गांधी न कहा कि हम पार्टी की राजनीति स ऊपर उठकर दश हित क बारे मं साचना चाहिए। उन्हांन कहा कि एक ताकतवर दश हमशा यह साचता है कि उसक कदम का दुनिया पर क्या असर पड़गा। हमं भी एक ताकतवर दश की तरह विश्व पर पड़न वाल प्रभावां का आकलन करना चाहिए, न कि यह साचना चाहिए कि दुनिया का क्या असर हमारे ऊपर पड़न वाला है। उन्हांन कहा कि इस समय दश की तरक्की की दिशा मं आग बढ़न का मौका हमारे पास है और हमं इस मौक का भरपूर फायदा उठाना चाहिए। राहुल गांधी न कहा कि जिस तरह कम्प्यूटर और टक्नालॉजी क क्षत्र मं भारत न विकास क नए आयाम गढ़ हैं उसी तरह आन वाल दिनां मं करार भी दश क विकास क लिए एक मील का पत्थर साबित हागा। उन्हांन कहा कि हमन आईटी और टलीकॉम मं काफी तरक्की की है और यदि एटमी करार पूरा हाता है ता परमाणु ऊर्जा क क्षत्र मं भी हम काफी आग तक जाएंग। राहुल गांधी का विपक्ष का भारी विराध सहना पड़ा। बसपा सहित विराधी खम क नताआं क हंगाम क कारण लाकसभा की कार्यवाही मं उत्पन्न हा रह व्यवधान का दखत हुए राहुल गांधी न खुद कई बार शांति की अपील की और कहा कि आप हमारे बुजुर्ग हैं और हम आपका सम्मान करत हैं। कृपया कर मुझ बालन क लिए 10 मिनट का समय द दं। उन्हांन विनम्रता स कहा कि आप भल ही मरी बातां का न मानं पर कम स कम मुझ अपनी बात रखन का मौका ता दं। ड्ढr मैं भी पीएम बनना चाहता हूं: लालूड्ढr नई दिल्ली (एजेंसियां)। रेलमंत्री लालू प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व सोनिया गांधी ने यह करार कर साहसिक कदम उठाया है। भाजपा और वामदलों को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंेने कहा कि आडवाणी ने न तो अमेरिका के और न ही करार के विरुद्ध कुछ कहा। वह तो हिन्दुत्व का नारा देते रहे जबकि वामदलों ने कांग्रेस से बंगाल और केरल में लड़ाई के चलते इस करार के बहाने समर्थन वापस ले लिया। विश्वास मत क दौरान सरकार का गिरान और बचान क लिए जारी सांसदां की जाड़—ताड़ की राजनीति पर चुटकी लत हुए कहा कि मैं भी प्रधानमंत्री बनना चाहता हूं, लकिन मुझ जल्दी नहीं है। प्रधानमंत्री पद क लिए मायावती के नाम पर उन्हांन कहा कि सभी नता प्रधानमंत्री बनना चाहत हैं।ड्ढr हर किसी की इच्छा हाती है कि वह प्रधानमंत्री क उच्च पद पर आसीन हा। मुझमं भी प्रधानमंत्री बनन की इच्छा है, पर मैं लाकतंत्र का गला काटकर यह पद हासिल नहीं करना चाहता। उन्हांन कहा कि यदि परमाणु समझौता हा जाता है, ता इसस दश का सस्ती दरां पर ऊर्जा की आपूर्ति हागी। उन्हांन कहा कि दश मं कायला का स्टॉक समाप्त हा रहा है, एस मं ऊर्जा आपूर्ति क लिए अन्य विकल्पां का तलाशना अहम हा गया है। लालू न अपन भाषण मं वामदलां और भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक पार्टियां पर खूब चुटकी ली और अपन चिर—परिचित अंदाज मं कहा कि ‘काशी क पंड और रंग—बिरंग झंड’ एक साथ मिलकर सरकार का नहीं गिरा पाएंग। परमाणु करार क जरिए भारत का अमेरिका का पिछलग्गू बनान क आरापां का खंडन करत हुए उन्हांन कहा कि डील का मकसद कवल अमेरिका क साथ परमाणु समझौता करना है। लोकसभा में नोटों के बंडलों से सनसनी लोकसभा में मनमोहन सिंह सरकार के विश्वास मत पर चर्चा के दौरान मंगलवार को उस समय सनसनी फैल गई जब मुरैना से भारतीय जनता पार्टी के सांसद अशोक अर्गल ने अचानक स्पीकर के आसन के सामने नोटों से भरे बैग खोलने शुरू कर दिये।ड्ढr नोटों के बंडल पेश करते हुए अर्गल ने आरोप लगाया कि विश्वास मत के दौरान अनुपस्थित रहन के लिए समाजवादी पार्टी के एक नेता ने उन्हें तीन करोड़ रुपये की पेशकश की थी। उन्होंने कहा कि पार्टी के दो अन्य सांसदों फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोरा को भी तीन-तीन करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी और एडवांस के तौर पर एक करोड़ रुपये दिये गये थे। अर्गल ने स्पीकर के सामने बैठे लोकसभा के महासचिव के टेबुल पर नोटों के बंडल फैलाने शुरू कर दिये। इनमें 1000-1000 रुपये के नोटों के दस बंडल थे। भाजपा के अन्य सदस्य भी नोट निकाल-निकाल कर दिखाने लगे। बाद में लोकसभा के कर्मियों ने नोटों को अपने कब्जे में ले लिया। अर्गल ने आरोप लगाया कि उन्हें यह पैसे सपा नेता अमर सिंह ने अपने एक आदमी के द्वारा उनके आवास पर भेजवाये थे। उन्होंने खुलासा किया कि इससे पहले सपा नेता रवती रमण सिंह ने सोमवार की रात उन लोगों की बात अमर सिंह से करायी और अमर सिंह ने वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहने के लिए तीन-तीन करोड़ की पेशकश की। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से पहले अमर ने कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल से भी सहमति ली। देश के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में इस तरह की पहली घटना के दौरान पूरे सदन में हंगामा खड़ा हो गया।ड्ढr तथा उपाध्यक्ष चरणजीव सिंह अटवाल ने कार्यवाही स्थगित कर दी। इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी न कहा कि सांसदों की खरीद-फरोख्त लोकतंत्र के लिए शर्मनाक हैं। उन्होंने कहा कि इससे साबित हो गया है कि सरकार बचाने में जुटे यूपीए के प्रबंधक किस तरह पैसा बांट रहे हैं। आडवाणी ने लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्ाी से पूर मामले की जांच कराने की मांग की है। भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज न कहा कि तीनों सांसदों को जो रुपय की पेशकश की गई थी वह एक टीवी चैनल के कैमरे में कैद है। इस बीच स्पीकर ने सभी राजनीतिक दलों को की आपात बैठक बुलायी। इसके बाद उन्होंने सदन में कहा कि जांच के बाद दोषी लोगों के खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई होगी। रल मंत्री लालू प्रसाद ने मांग की कि अशोक अर्गल का नार्को टेस्ट हो। उन्होंने कहा कि यह संसद की मर्यादा का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि यह सरकार को बदनाम करने का षडयंत्र है। उन्होंने कहा कि हार निश्चित देख भाजपा ने यह षडयंत्र रचा है। उन्होंने अर्गल को गिरफ्तार करने की मांग की। सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने कहा कि यह भाजपा का षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि इतने छोटे बैग में एक करोड़ रुपये आ ही नहीं सकते हैं। ड्ढr

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