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26 मई, 2020|1:36|IST

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शाही नरसंहार में नया खुलासा

नेपाल के राजमहल में सात वर्ष पहले हुआ शाही नरसंहार एक बार फिर सुर्खियों में है। एक मीडिया रिपार्ट में एक प्रत्यक्षदर्शी ने दावा किया है कि राजमहल में नरसंहार को युवराज दीपेंद्र ने अंजाम नहीं दिया था और सबसे पहले उन्हीं को गोली मारी गई थी। 1 जून, 2001 की रात हुई उस त्रासद घटना में तत्कालीन महाराज बीरंेद्र समेत शाही परिवार के दस लोग मारे गए थे। नेपाली दैनिक अखबार ‘नया पत्रिका’ ने लाल बहादुर लामतरी मागर नामक एक व्यक्ित का बयान प्रकाशित किया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि वह नरसंहार के समय न सिर्फ मौजूद थे, बल्कि उन्होंने घायल महाराज बीरंेद्र केा अस्पताल में भर्ती भी कराया था। मागर सेना मंे हवलदार थे और उनका दावा है कि उस दिन वह शाही महल में तैनात थे। मागर ने अखबार को बताया कि फायरिंग की आवाज सबसे पहले शाही महल के उस हिस्स में सुनाई दी, जहां युवराज दीपंद्र का आशियाना था।ड्ढr उस रात दीपेंद्र शराब और दूसरे मादक द्रव्यांे के असर से मुक्त होने के बाद वहां आराम करने चले गए थे। सबसे पहले दीपेंद्र केा ही गाली मारी गई। उनके मुताबिक हमलावर उन्हंे मारने के बाद महल के मुख्य हॉल में गया और उसने अंधाधुंध फायरिंग की। मागर के मुताबिक उन्होंने खून से लथपथ महाराज बीरेंद्र केा अस्पताल मंे भर्ती कराया था। तब वह जिंदा थे और दर्द से कराह रहे थे। मागर का कहना है कि उस रात पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र के पुत्र पारस राजमहल में डिनर पार्टी में शामिल होने आए तो उनके साथ एक और व्यक्ित था, जिसने दीपेंद्र के चेहरे की तरह दिखने वाला मुखौटा पहन रखा था। इसी मुखौटाधारी व्यक्ित ने शाही परिवार के अन्य लोगों को मारने से पूर्व दीपेंद्र को गोली मारी। मागर ने बताया कि उन्होंने कुछ साथियों के साथ मिलकर राजमहल को बिना नाम का एक पत्र लिखा जिसमें दीपेंद्र के निर्दोष होने का जिक्र किया गया था। लेकिन तीन महीने पहले पद अवनति करते हुए उनका दूसरे बटालियन में तबादला कर दिया गया।

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