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गोमती में समागई सैकड़ों बीघा फसल

गोमती नदी का बढ़ता जलस्तर तराई क्षेत्र पर भारी पड़ रहा है। बख्शी का तालाब क्षेत्र के घैला, कठवारा, शिवपुरी, बहादुर पुर, सुलतानपुर, लासा, बसहरी, अकड़रिया, दुघरा व जमखनवाँ आदि गाँवों की सैकड़ों बीघा खेती जलमग्न हो गई है। केन्द्रीय जल आयोग की दैनिक रिपोर्ट मेंोदी के जलस्तर को ‘बढ़ता’ बताया गया है। परन्तु प्रशासन ने इसे बाढ़ग्रस्त क्षेत्र नहीं माना है।ड्ढr बसहरी घाट पुल के पास गोमती नदी दोनों किनारों पर उछाल मार रही है। तटवर्ती खेतों को गोमती ने अपने आगोश में ले लिया है। सुलतानपुर खड़ंजा मार्ग की पुलिया पानी में डूबती जा रही है। बहादुरपुर के खड़ंजे पर पानी बह रहा है। उधर, जमखनवाँ व शिवपुरी खरजा (नाला) में पिछले हफ्ते से गोमती का पानी उल्टा बह रहा है। यह पानी तराई क्षेत्र की फसलों को तबाह कर रहा है। लासा, अकड़रिया खुर्द, दुघरा व अकड़रिया कलाँ गाँवों के पूर्व में बाढ़ का पानी्र बढ़ता ही जा रहा है। बाढ़ ने सैकड़ों बीघे में बोई गई धान, मेंथा, उड़द, मक्का, वार, बाजार, तिल व सब्जियों की फसल कड्डो लील लिया है। कच्चे मकान मेंोमींदो होतेोा रहे हैं। लासा की 60 वर्षीय सुखरानी और पुत्तीलाल कहते हैं कि सरकार अब गोमती पर बाँध बनवा दे। तहसीलदार सीएल. मिश्रा ने बताया कि जिनके कच्चे मकान गिर गए हैं, उन्हें 1500 या 2,500 की सहायता दी जा रही है। वैसे अभी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। गोमती ने घैला से जमखनवाँ तक तबाही मचा रखी है। केन्द्रीय जल आयोग की दैनिक रिपोर्ट में भी दर्शाया गया है कि भटपुर घाट (सीतापुर) में खतर के निशान के करीब और लखनऊ में पानी सामान्य स्तर से ऊपर चढ़ गया है पर प्रशासन ने अभी बसहरी को बाढ़ग्रस्त नहीं घोषित किया।ड्ढr गोमती का पानी घैला के गाँवों तक पहुँचने के बाद से राास्व निरीक्षक के नेतृत्व में एक दल गाँव में कैम्प कर रहा है। एसडीएम सदर उमेश पाण्डेय ने भी गाँव का दौरा किया। उनका कहना है कि पाँच दिन पूर्व की स्थिति बनी हुई है। घरों में पानीोाने की नौबत नहीं है।

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