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उच्च शिक्षा के लक्ष्य पर ग्रहण के संकेत

राज्यों द्वारा शिक्षा पर खर्च में कटौती के रुझान पर केंद्र ने चिंता प्रकट करते आशंका जाहिर की है कि इससे मौजूदा पंचवर्षीय योजना में सकल घरलू उत्पाद दर (ाीडीपी) का निर्धारित छह फीसदी का लक्ष्य प्राप्त करना संभव नहीं हो सकेगा। शिक्षा मद में लगातार कटौती से असंतुष्ठ मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को राजधानी बुलाकर शैक्षिक विकास का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सक्रिय पहल करने कीअपील की है। केंद्र का आकलन है कि खर्च में कौटती के कारण न केवल दाखिला दर बल्कि शैक्षिक गुणवता के भी प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। शिक्षा पर केंद्र सरकार जीडीपी का .7ीसदी खर्च करती है जबकि राज्य सरकारं 2 .73 फीसदी खर्च करती हैं। फिलहाल शिक्षा पर कुल जीडीपी का 3.54 फीसदी खर्च किया जाता है। 2001 से राज्यों के शेयर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। केंद्रीय शिक्षा सचिव आर.पी.अग्रवाल ने बताया कि बिहार, आंध्र, उ.प्र., पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात, केरल, म.प्र., हरियाणा और दिल्ली जसे घनी आबादी वाले राज्य ग्रौस स्टेट डामेस्टिक प्रोडक्ट्स का महा दो फीसदी खर्च कर रहे हैं। 2001 से पहले ये राज्य चार फीसदी खर्च कर रहे थे। अजरुन ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में शैक्षिक विकास के व्यापक विस्तार कार्यक्रमों का हवाला दते हुए निर्धारित लक्ष्य प्राप्त करने के लिए राज्यों से सहयोग की अपील की है। मौजूदा पंचवर्षीय योजना में शैक्षिक विकास कार्यक्रमों के तहत तीस केंद्रीय विवि,14 विश्वस्तरीय विवि ,8 आईआईटी , 7 आईआईएम ,5 इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एण्ड रिसर्च के अलावा 20 आईआईआईटी, दो प्लानिंग एण्ड आर्किटेक्चर स्कूल के साथ एक हाार नये पालिटेक्िनक स्थापित करने का लक्ष्य है।

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