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‘स्वयं श्रीरचाम ने तोड़ा था रामसेतु’

अब तक राम और रामसेतु के अस्तित्व को नकारती आई केंद्र सरकार ने बुधवार को कहा कि राम सेतु को राम ने तीन योजनों (एक योजन यानी लगभग छह मील) में तोड़ा था यही वजह है कि इसकी कोई पूजा नहीं करता। पद्म पुराण और कंब रामायण में इस बात का स्पष्ट जिक्र है। सरकार ने यहां तक कहा कि सुप्रीम कोर्ट किसी प्रोजेक्ट की सुपरवाक्षरी और अप्रूविंग अथॉरिटी नहीं है। न ही कोर्ट किसी इमारत को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए अध्ययन करने का आदेश दे सकता है। यह काम पूर्ण रूप से विधायिका के अधिकार क्षेत्र में है। केंद्र सरकार के इस तर्क से वाल्मीकि रामायण में आस्था रखने वाले उत्तर भारतीय और दक्षिण में कंब रामायण के श्रद्धालुओं के बीच बहस छिड़ सकती है। विश्वास मत की ऊरा से सरोबार केंद्र सरकार 2087 करोड़ रुपये के सेतु समुद्रम प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर अटल दिखी। सरकार ने कहा कि याचिकाकर्ता कह रहे हैं कि यह पुल न तोड़ा जाए क्योंकि यह आस्था का प्रश्न है, लेकिन इसमें आस्था है कहां। पुल पहले से ही तीन जगह टूटा हुआ है और यह भी किसी और ने नहीं स्वयं राम ने इसे तोड़ा है। यह खंडित है और खंडित मूर्ति या वस्तु की पूजा नहीं की जाती है। यही वजह है कि सदियों से किसी ने भी रामसेतु की पूजा नहीं की है। सिर्फ रामेश्वरम मंदिर की ही पूजा होती आई है। केंद्र सरकार की ओर वरिष्ठ अधिवक्ता फाली एस नारीमन ने यह तर्क देते हुए वीं सदी में दक्षिण भारत में रचित गई कंब रामायण का जिक्र किया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने चुटकी ली और कहा कि पुल इसलिए तोड़ा गया कि कहीं रावण वापस न आ जाए। फाली ने कहा कि खंडित होने के कारण ही पिछले 150 वर्ष से हो रहे शिपिंग कैनाल के अध्ययन के दौरान किसी ने भी धार्मिक आस्था का मुद्दा नहीं उठाया। इससे पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के जी बालाकृष्णन, आर वी रविंद्रन और जे एम पांचाल की विशेष पीठ ने नारीमन से कहा कि एलाइनमेंट नंबर 6 की जगह 3 (रामेश्वरम-धनुषकोडि) पर सरकार काम कर सकती है इससे रामसेतु को नुकसान नहीं पहुंचेगा। बेहतर होगा कि वह इस मामले का तकनीकी और राजनैतिक हल निकालने के साथ विश्वास को भी थोड़ी जगह दे। लेकिन फाली ने कहा कि कहा कि यह विकल्प उपयुक्त नहीं पाया गया है।

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  • Web Title: ‘स्वयं श्रीरचाम ने तोड़ा था रामसेतु’