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सरकार का मंगल, बागियों का अमंगलमाकपा ने सोम दा को भी नहीं बख्शा

माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने हाल के वर्षो में अब तक का सबसे कड़ा सांगठनिक फैसला लेते हुए लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्ाी को पार्टी अनुशासन तोड़ने और दल के लिए संकट के हालात पैदा करने के आरोप में पार्टी से बर्खास्त कर दिया। देश के संसदीय इतिहास में यह अनोखी घटना है जब लोकसभा का संचालन करने के लिए अनुशासन व नियमों से बंधा व्यक्ित अपनी पार्टी की आंख की किरकिरी बन गया। लगातार दस बार लोकसभा सांसद रह चुके सोमनाथ के निष्कासन को पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारक समिति ने 20 जुलाई की बैठक में हरी झंडी दी थी।ड्ढr समिति ने उन्हें कहा था सरकार से समर्थन वापसी के बाद बदले हालात में उनके स्पीकर पद पर बने रहने से पार्टी की किरकिरी हो रही है। इसलिए वह पद का मोह छोड़ दें। लेकिन सोमनाथ ने पार्टी निर्देशों को ठुकराते हुए पद छोड़ने से इंकार कर दिया था। यही नहीं, उन्होंने एटमी करार पर सरकार से नाता तोड़ने व विश्वासमत में भाजपा के साथ वोट डालने से भी इनकार कर दिया। कांग्रेस चटर्ाी के बचाव में उतर आई है। पार्टी ने कहा है कि पार्टी से निष्कासित होने के बाद भी वे अपने पद पर बने रह सकते हैं क्यों कि स्पीकर का पद दलीय राजनीति से पर होता है।ड्ढr माकपा सूत्रों के मुताबिक सोमनाथ ने इसके बाद पार्टी महासचिव को एक खत भी लिखा था, जिसे उनकी ओर से मीडिया को लीक कर दिया गया। इससे माकपा की काफी फाीहत हुई। पार्टी के वयोवृद्ध नेता ज्योति बसु ने आखिरी दम तक कोशिश की कि सोमनाथ की उम्र के इस मुकाम में कोई अप्रिय कदम न उठाना पड़े लेकिन उनकी कोशिशें बेकार गई। सोमनाथ भी अड़े रहे कि उनका पद संवैधानिक दायर में आता है और अध्यक्ष के रूप में वे किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं। माकपा नेतृत्व ने उनके तर्को को खारिा करते हुए कहा कि श्री चटर्ाी ने पार्टी संविधान के नियम 1अनुच्छेद 13 का उल्लंघन करते हुए पार्टी के हितों को चोट पहुंचाई है। ऐसी दशा में पोलित ब्यूरो ने सर्वसम्मति से तत्काल प्रभाव से उन्हें पद से हटाने का फैसला कर लिया।ड्ढr सोमनाथ पर कार्रवाई से बोलपुर नाखुश : पेज-16भाजपा ने आठ तो तेदेपा ने एक निकाला नयी दिल्ली। बीजद के बाद अब भाजपा और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने क्रमश: अपने आठ व एक सांसद को पार्टी से निकाल दिया है। इन सांसदों ने विश्वास मत जीतने में संप्रग सरकार की मदद करके पार्टी ह्विप का उल्लंघन किया था। एमडीएमके और शिरोमणि अकाली दल भी अपने कुछ सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। विभिन्न सियासी दल अपने जिन सांसदों पर कार्रवाई कर चुके हैं या करने की तैयारी में हैं उन पर आरोप है कि उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से संप्रग सरकार की विश्वास मत जीतने में मदद की। इनमें कुछ ने वोट न डालकर, कुछेक ने सदन से अनुपस्थित रहकर तो कुछ ने क्रॉस वोटिंग कर संप्रग की मदद की।ड्ढr भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के आवास पर हुई बैठक के बाद इन सांसदों को निष्कासित करने का फैसला हुआ। आडवाणी ने कहा कि पार्टी ने दलबदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों की लोकसभा की सदस्यता समाप्त करने की मांग भी की है। उधर, एमडीएमके ने अपने बागी एमपी एल. गणेशन और जिंजी रामचंद्रन की संसद सदस्यता निरस्त कराने के लिए लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखने की बात कही है। तेलुगू देशम पार्टी ने अपने एक सांसद एम. जगन्नाथम को पार्टी से निकाल दिया है और दूसर एमपी डी के आदिकेशवलू नायडू के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का फैसला किया है। शिरोमणि अकाली दल भी पार्टी के सांसद सुखदेव सिंह लिब्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करगा।ड्ढr घूसखोरी पर विशेषाधिकार हनन नोटिस देगी सपा : घूसखोरी के आरोप से बिफरी सपा ने भाजपा के तीन सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस जारी करने का फैसला किया है। इस सिलसिले में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह और पार्टी महासचिव अमर सिंह ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी से मुलाकात की थी। सपा नेता मोहन सिंह ने कहा कि भाजपा सांसदों की हरकत से संसद की गरिमा को नुकसान पहुँचा है। मंगलवार को सदन में भाजपा के सांसद फगन सिंह कुलस्ते, महावीर भगोर और अशोक अर्गल ने सपा सांसद रवती रमण सिंह और अमर सिंह पर घूसखोरी का आरोप लगाया था।ड्ढr ं

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