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बालू घाटों की बंदोबस्ती अपने हाथ लेगी सरकार

रायल्टी वसूली की पुरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी राज्य सरकार बालू घाटों की बंदोबस्ती का अधिकार फिर से अपने हाथ में लेने पर विचार कर रही है। इससे बालू की रायल्टी भी सीधे खान एवं भूतत्व विभाग को मिलेगी। वर्ष 2005 में राज्य के तमाम बालू घाट स्थानीय राजस्व ग्राम के हवाले कर दिये गये थे। उद्देश्य यह था कि इससे स्थानीय बेरोजगार नवयुवकों और ग्राम सभा के सदस्यों को रोजगार मिलेगा।ड्ढr विधानसभा की समिति को शिकायतें मिली थीं कि बालू घाटों का अधिकार ग्राम सभा को दे दिये जाने से स्थाीनय लोगों को कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि दबंग और असामाजिक तत्वों ने बालू घाटों पर अपना कब्जा जमा लिया है। एसी शिकायतों के बाद खान एवं भूतत्व विभाग फिर से बालू घाटों की बंदोबस्ती करने और रायल्टी वसूली की पुरानी व्यवस्था लागू करने का मन बना रहा है। बालू की रायल्टी से पहले सरकार को चार करोड़ रुपये महीने मिलते थे। तब रायल्टी की दर मात्र 18 रुपये प्रति ट्रक थी। अब इसे बढ़ाकर 25 रुपये करने का प्रस्ताव है। राज्य में फिलहाल 442 बालू घाट हैं। सबसे अधिक जमशेदपुर में 62, बोकारो में 40, पलामू में 32, कोडरमा में 35, दुमका में 35, सरायकेला में 32, गढ़वा में 27 और रांची में 23 बालूघाट हैं। अन्य जिलों में चार से लेकर 18 बालू घाट हैं। पहले बालू घाटों के संचालन में विवाद पर उपायुक्त को अंतिम निर्णय का अधिकार दिया गया था।

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