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दुनिया से अलग हैं रजौली के 40 गांव

एक तरफ मानव अब चांद और मंगल ग्रह पर बसने की संभावना तलाश रहे हैं। लकिन दूसरी तरफ पृथ्वी पर बसे नवादा िंजले के रजौली इलाके के 40 गांववासी 21वीं सदी में भी दुनिया के उस पार है, जो देश-दुनिया में हो रहे विकास की गतिविधियों से अलग- थलग हैं। जंगल व पहाड़ के किनारे अवस्थित ग्रामीणों का प्रखंड, अनुमंडल व जिला मुख्यालय स कोई संपर्क नहीं है।ड्ढr ड्ढr दो तिहाई पहाड़ और एक तिहाई जल से घिरा है। लिहाजा, ग्रामीण झारखंड के कोडरमा व गया जिले के गझण्डी के पहाड़ी रास्ते से नवादा जिले में प्रवेश करते हैं, जो 40-50 किलोमीटर की दूरी है। दूसरा विकल्प हाल के वर्षो से नाव बना है, जा काफी खर्चीला और परेशानी भरा है। ग्रामीणों की ऐसी स्थिति आदिकाल से नहीं है बल्कि 1में निर्माण हुए फुलवरिया जलाशय के बाद से हुई है। डैम क्षेत्र में टोले, बिगहा समेत 40 गांव था ,जिनमें से आधे गांवों को हरदिया के समीप जैसे-तैसे स्थिति में विस्थापित कर दिया गया और उंचाई वाले गांवों को डैम्प क्षेत्र में ही छोड़ दिया गया है। लिहाजा, हरदिया पंचायत के चोरडीहा, नावाडीह, झराही, सुअरलेटी, भानेखाप, जमुन्दाहा, पिछली, पीपरा, कुम्भियातरी कोडरमा का विशनपुर,सपही एवं ढोढाकोला जैस कई गांवों के ग्रामीण शिक्षा, स्वास्थ, बिजली, पेयजल, संचार, सड॥क जैसी बुनियादी समस्याओं से त्रस्त हैं। वैसे ता कागजों पर सारी योजनाएं चल रही हैं, लकिन वास्तविकता कुछ और है।

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