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दो टूक

विश्वास मत के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वालों को उनकी पार्टियों से निकाल दिया गया है। शायद उनकी सदस्यता भी चली जाये। अब पार्टी कार्यकर्ता उनके घरों पर हमले कर रहे हैं। तोड़-फोड़ और आगजनी हो रही है। पार्टियां कार्यकर्ताओं को अनुशासित करने के बजाये इसे गुस्से का स्वाभाविक नतीजा बता रही हैं। संसदीय आचरण के उल्लंघन की सजा का इंतजाम संसदीय व्यवस्था में ही है। फिर चुनाव के वक्त पाला बदलने वालों को जनता की अदालत में जाना ही होगा। उन पर हमले संसदीय व्यवस्था के प्रति अविश्वास प्रस्ताव की तरह हैं। यह सांसदों को खरीदने से ज्यादा बड़ा अपराध है। वह संसदीय व्यवस्था को भ्रष्ट बनाने की कोशिश थी, यह उसे बेमतलब बनाने का प्रयास है।

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