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श्रीलंका के साथ आर्थिक सहयोग समझौता जल्द

अगर आप पर्यटन या स्वास्थ्य सेवाओं संबंधी कोई कारोबार श्रीलंका में करना चाहते हैं या फिर वहां कोई अन्य उद्योग-धंधा शुरू करना चाहता है तो समझिये कि आपकी मुश्किल जल्द ही आसान होने वाली है। भारत और श्रीलंका दोनों ही व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते में हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। इसे औपचारिक रूप से आगामी दो और तीन अगस्त के दौरान कोलंबों में होने वाले सार्क शिखर सम्मेलन के दौरान हरी झंडी दी जाएगी। इस पर भारत की ओर से प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह हस्ताक्षर करंगे। दरअसल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता यानी एफटीए वर्ष 1से ही लागू है। अब इसके जरिए द्विपक्षीय व्यापार कई गुना बढ॥कर 3.2 अरब डॉलर पहुंचने के बाद दोनों देशों ने इस नये समझौते की रूपरखा तय की है। नये समझौते में व्यापारिक संबंधों को और गहरा करने और उन्हें सुविधाजनक बनाने के साथ ही अब द्विपक्षीय निवेश को आसान बनाने, एक-दूसर के यहां कई प्रकार की सेवा उद्यम शुरू करने और अन्य आर्थिक सहयोग के पहलुओं को शामिल किया जा रहा है। दोनों देश एक-दूसर के लिए अपने सेवा क्षेत्रों को उदार बनाएंगे। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक पर्यटन, स्वास्थ्य, मैरीटाइम और कई सेवाओं के मामले में अन्य देशों को दिये गये प्रस्ताव से कहीं अधिक रियायतें श्रीलंका को दिये जाने का प्रस्ताव है और हम उनसे बदले में भी यही चाहते हैं। सैद्धांतिक रूप से श्रीलंका इसके लिए तैयार भी है। दोनों ही देशों के बीच अधिकांश उत्पादों में मुक्त व्यापार शुरू होने के बावजूद अभी भी दोनों ही देश अपनी-अपनी नकारात्मक सूची बनाये हुये हैं। तकनीकी रूप से भारत की इस निगेटिव लिस्ट में लगभग 42उत्पाद हैं जबकि श्रीलंका की सूची में 1180 से अधिक उत्पाद है। मतलब यह है कि इस सूची के उत्पादों के आयात-निर्यात में कोई अतिरिक्त रियायत नहीं दी गई है। अब दोनों ही देश अपनी-अपनी सूचियों की काट-छांट करने के लिए तैयार हो गये हैं। इसके बाद दोनों ही देश अपने अपने सैकड़ो संवेदनशील उत्पादों का भी मुक्त आयात-निर्यात शुरू कर सकेंगे।ड्ढr

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