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कूड़े से हो रही गोमती चाहरीली

गांधी सेतु के निकट डम्प कूड़ों के ढेर से रिसकर गोमती के पानी में मिल रहे रसायन कैंसर, गुर्दा रोग, पेट रोग व एनीमिया की वाह बन सकते हैं। कई महीनों से पानी में घुल रहे इन रसायनों का Êाहर सामान्य तरीके से नष्ट होने में 50 साल से अधिक लगेंगे। यहोहरीले रसायन हैं- क्रोमियम, आर्सेनिक, सीसा, नाइट्रेट और फ्लोराइड आदि। नेशनल इनवायरमेंटल रिसर्च इंस्टीटय़ूट (नीरी) ने राय और केन्द्र सरकार को भेाी रिपोर्ट में नदियों के पानी में ऐसे खतरनाक तत्वों के मिश्रण रोकने के लिए फौरन सख्त कदम उठाने की सलाह दी है।ड्ढr शाम ढलते ही चमकदार रोशनी में डूबोाने वाले गांधी सेतु तट पर मौत का वाहक बनने वाला कचरा महीनों से डालाोा रहा है। नीरी के वैज्ञानिकों की कुछ दिन पहले इस ओर नार गई। वैज्ञानिकों ने सेतु के निकटोमा कूड़े से निकलकर पानी में मिल रहे रसायनों का परीक्षण शुरू किया। आसपास के पानी और कचरों के ढेर से निकल रही गैसों के नमूनों की भीोाँच हुई,ोिसमें पता चला कि गांधी सेतु के किनार डाले गए कूड़े में ौविक (अस्पताली) कचरा, बूचड़ खानों के अपशिष्ट व औद्योगिक इकाइयों के कचर हैंोिनसे खतरनाक रसायन रिस कर गोमती के पानी में मिल रहे हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि अपशिष्ट को कहीं दूसरीोगह डम्प कियोाए।ड्ढr

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