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यह बंगलुरु ब्लास्ट की कड़ी तो नहीं!

अब तकोिन आतंकी संगठनों ने भी हाल के वर्षो में बम विस्फोट किए हैं, उन्होंने दो बातों का ध्यान रखा है: एक, बम की क्षमता तीव्र हो और दो, उसे भीड़भाड़ वाले इलाके में इस तरह रखाोाए कि यादा से यादा लोग हताहत हों। दो दिनों में दो प्रमुख शहरों में हुए सीरियल ब्लास्ट इसके उलट हैं। तो क्या कोई ऐसा संगठन सक्रिय हुआ हैोो दहशत फैलाने में यादा यकीन कर रहा है!ड्ढr अभी अहमदाबाद में उपयोग किए गए बम का विश्लेषण नहीं हुआ है लेकिन कुछ विशेषज्ञ तीव्रता के ख्याल से यहाँ और बंगलुरु के बमों में समानता बता रहे हैं। बंगलुरु में शुक्रवार को फटे और शनिवार सुबह बरामदोिंदा बमों की आरंभिकोाँच से पता चला है कि इन बमों में 300 से 500 ग्रामोिलेटिन पाउडर का इस्तेमाल हुआ है। इनमें पतले, छोटे, धारदार छर्रो और छोटे नट-बोल्ट्स को मिलाया गया है। हुबली में करीब दो माह पहले- 10 मई को दहशतगर्दो नेोिस तरह का विस्फोट किया था, वे बंगलुरु और अहमदाबाद-ौसे ही थे। हुबली में सिमी- लश्कर-ए-तैयबा सेोुड़े अन्य उग्रवादियों के मुकदमों की सुनवाई से ऐन पहले अदालत में करीब डेढ़ बो दिन में विस्फोट किया गया था। बेंगलुरु में शनिवार को हुए विस्फोट भी दोपहर बाद हुए हैं। अहमदाबाद में विस्फोटों की भी तीव्रता यादा नहीं रही है। यहाँ मरने वालों की संख्या इस वाह से यादा है क्योंकि ये विस्फोट भीड़भाड़ वाले इलाकों में हुए हैं। बंगलुरू पुलिस के सूत्र का कहना है कि लो इनटेंसिटी बमों का चतुर उपयोगोयपुर और हैदराबाद में हुए बम विस्फोटों से अलग है।ं

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