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डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्िटस बनेगी अपराध

इस बीच, प्रदेश सरकार ने छत्रपति शाहूाी महाराा चिकित्सा विश्वविद्यालय और प्रदेश के आगरा, मेरठ, झाँसी, कानपुर, गोरखपुर और इलाहाबाद में स्थित रााकीय मेडिकल कॉलेाों के वर्तमान डॉक्टरों (चिकित्सा शिक्षकों) के लिए संविदा पर नौकरी करने का विकल्प खोल दिया है। कैबिनेट द्वारा मांूर की गई सेवा शर्तो में स्पष्ट है किोो वर्तमान डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्िटस करना चाहते हैं उन्हें नियमित नौकरी छोड़नी होगी। इसके लिए वे अपनी सेवा के अनुसार वीआरएस ले सकते हैं या उन्हें इस्तीफा देना होगा। उसके बाद ही उन्हें संविदा पर रखाोा सकेगा।ोो डॉक्टर नियमित रहकर नौकरी करना चाहते हैं, वे प्राइवेट प्रैक्िटस नहीं कर सकेंगे। ये सेवा शर्ते पहली अगस्त-2008 से शासनादेशोारी होते ही लागू होोाएँगी।ड्ढr संविदा की सेवा शर्तो के अनुसार तीन साल का करार होगा। हर साल करार का समीक्षा के बाद नवीनीकरण होगा। प्रोफेसर को 40 हाार, एसोसिएट प्रोफेसर को 35 हाार, असिस्टेंट प्रोफेसर को 30 हाार और लेक्चरर को 25 हाार रुपए प्रतिमाह संविदा वेतन मिलेगा। एसे लोगों को कोई प्रशासनिक पद नहीं मिलेगा। नियमित नौकरी छोड़कर संविदा पर रखेोाने वाले इन डॉक्टरों की पेंशन सरकार द्वारा निर्धारित वेतन मेंोुडकर मिलेगी। लेकिन कुल धनराशि उनकी नौकरी के समय मिल रहे वेतन से अधिक नहीं होगी। उदाहरण के लिए प्रोफेसर को नौकरी छोड़ने पर उनका संविदा वेतन और पेंशन मिलाकर 65 हाार बनता है। लेकिन उनको नौकरी छोड़ते समय 58 हाार वेतन मिल रहा था तो 58 हाार रुपए ही उनको प्रतिमाह मिलेंगे। 62 साल की उम्र के बाद उनको संविदा नौकरी पर नहीं रखाोाएगा। सेवानिवृत्त डॉक्टर उसी स्थिति में संविदा पर रखेोाएँगे,ोब डॉक्टरों की भारी कमी सरकार को लगेगी। उसके लिए पुराने शासनादेश में कुछ संशोधन किएोाएँगे। लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद रखेोाने वाले डॉक्टरों की पेंशन उनके संविदा वेतन में नहींोुड़ेंगी बल्कि घटाकर वेतन मिलेगा। खास बात यह है कि छत्रपति शाहूाी महाराा चिकित्सा विश्वविद्यालय में संविदा नवीनीकरण कुलपति और मेडिकल कालेाों के डॉक्टरों का नवीनीकरण महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा द्वारा होगा।ोो डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्िटस नहीं करंगे, उनकी सुविधाएँ बढ़ेंगी। ौसे घर पर फोन आदि की सुविधाएँ उन्हें मिलेंगी।ं

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  • Web Title: प्रदेश सरकार प्राइवेट प्रैक्िटस को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में लाने के लिए कड़ा कानून बनाने की तैयारी कर रही है। उच्च स्तरीय सूत्रों के अनुसार कानून में इस तरह की व्यवस्था होगी कि कोई भी डॉक्टर यदि प्राइवेट प्रैक्िटस करता पाया चााता है तो उसे पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकेगी और इस अपराध को गैर चामानती बनाया चााएगा। इस मसले पर सरकार विधि विशेषज्ञों से राय लेने चाा रही है। इस बात का भी विचार किया चाा रहा है कि छत्रपति शाहूचाी महाराचा चिकित्सा विश्वविद्यालय का कुलपति डॉक्टर न होकर सामान्य शिक्षा का एसा प्रोफे सर या आईएएस अधिकारी हो चिासमें प्रशासनिक क्षमता हो। इन सारी चीचाों को अमलीचाामा पहनाने में कुछ समय लगेगा।