DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

झारखंड में शिशु मृत्यु दर अधिक

नेशनल फैमिली हेल्थ सव्रे-3 की रिपोर्ट का उपयोग स्वास्थ्य विभाग कमियां दूर करने के लिए करगा। आइआइसीएम में शनिवार को आयोजित कार्यशाला में स्वास्थ्य सचिव डॉ प्रदीप कुमार ने उक्त रिपोर्ट जारी की। कार्यक्रम का आयोजन नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ पोपुलेशन सांइस मुंबई और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से किया था। इंस्टीटय़ूट की प्रो सुबाला परशुरमन ने सव्रे के बार में विस्तार से जानकारी दी। निदेशक प्रमुख डॉ जीतेंद्र कुमार ने कहा कि सव्रे से झारखंड में शिशु मृत्यु दर अधिक होने की बात सामने आयी है। भारत सरकार के राजेश भाटिया, आरसीएच के डॉ विजय नारायण सिंह ने भी अपने विचार रखे। संचालन प्रो एसपी सिंह और धन्यवाद ज्ञापन शबीर ने किया।ड्ढr गंभीर बातें उभरी सव्रे मेंड्ढr देशव्यापी सव्रे के दौरान कई गंभीर बारं उभर कर सामने आयीं हैं। इसमें बताया गया कि 18 प्रतिशत महिलाएं ही शिशु दर में अंतर रखने के उपाय का प्रयोग करती हैं। प्रत्येक बच्चे का संपूर्ण टीकाकरण नहीं हो पा रहा है। पांच साल से कम उम्र के 20 प्रतिशत बच्चे कमजोर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इसका संबंध गरीबी से नहीं है। संपन्न घरों की संतान भी कुपोषण के शिकार पाये गये। ग्रामीण क्षेत्रों में आधे से ज्यादा घरों में पाइप से पानी नहीं आता है। शौचालय की सुविधा नहीं है। 40 प्रतिशत से भी कम लोगों को पता है कि कंडोम से एड्स को रोका जा सकता है। स्वास्थ्य व्यक्ति को भी यह रोग हो सकता है, इसकी जानकारी कम लोगों को नहीं है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: झारखंड में शिशु मृत्यु दर अधिक