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कागचाों पर ही बन रहे हैं गरीबों के मकान

हाईटेक सिटी हो या इंटीग्रेटेड टाउनशिप योना, इनमें गरीबों के मकान कहाँ बनेंगे? यह न तो बिल्डर को पता है और न ही प्रदेश सरकार को। अब शासन इस बात पर भी विचार कर रहा है कि योना के हर सेक्टर में ईडब्ल्यूएस और एलआईाी मकान बनाने की अनिवार्यता कर दीोाए। क्योंकि अभी बिल्डर इस वर्ग के मकान बनाने की औपचारिकता पूरी कर रहा है वह भी कॉलोनी में सबसे दूर।ोो मकान बन रहे हैं उनकी कीमत भी लाखों में है। लिहा गरीबों की पहुँच से दूर। सरकार ने कीमत नियंत्रित करने के लिएोिला स्तर पर कमेटी बनाने का फैसला किया था, लेकिन कमेटियाँ भी नहीं बन पाईं।ड्ढr यह स्थिति तब हैोब केन्द्र सरकार ने राय सरकारों को साफ दिशा-निर्देश दिए हैं कि वे हर हाल में निाी और सरकारी तौर परोो भी आवासीय योनाएँ चलाएँ उनमें आम आदमी की पहुँच वाले मकानोरूर बनाएँ। एक बिल्डर ने तो सूबे की रााधानी में सबसे छोटी श्रेणी केोो मकान बनाए हैं उनकी कीमत साढ़े सात लाख रुपए से 18 लाख रुपए के बीच रखी है।ड्ढr राष्ट्रीय आवास नीति 2007 में रायों से कहा गया है कि सरकारी और निाी बिल्डरों की कॉलोनियों में 10 प्रतिशत आवास निर्बल आय वर्ग के लिए और 10 प्रतिशत आवास अल्प आय वर्ग के लिए मकान बनवाएोाएँ। लेकिन अभी तक इस योना पर काम शुरू नहीं हो पाया है। आवास विकास परिषद ने भी 15ोनवरी कोोो हाईटेक आवास योना शुरू की, उसमें भी 17 लाख रुपए से 35 लाख रुपए की कीमत वाले मकान प्रस्तावित किए गए। हालत यह हुई कि योना में चार बार पांीकरण तारीख बढ़ाई गई।ड्ढr निाी क्षेत्र के नौ बिल्डरों ने हाईटेक सिटी योना का लाइसेंस लिया। कई बिल्डरों ने तो ईडब्ल्यूएस और एलआईाी मकानों के अपनी योना में अभी तक चिह्न्ति भी नहीं किया है।

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