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अब आत्मदाह नहीं करंेगे फाल्गुनी प्रसाद यादव

ाल्गुनी-नरन्द्र प्रकरण में राजग सरकार और अपनी पार्टी को फजीहत से बचाने के लिए आखिरकार भाजपा आलाकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा। मामला भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व तक पहुंचा और राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के ‘आग्रह’ पर विधायक फाल्गुनी प्रसाद यादव ने विधानसभा में आत्मदाह की अपनी घोषणा वापस ले ली। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री और जद यू नेता नरन्द्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े श्री यादव के मामले में पंचायत के लिए राजनाथ सिंह ने उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और श्री यादव को दिल्ली बुलाया था। रविवार को दोनों नेता दिल्ली में उनके निवास पर उनसे मिले। श्री यादव ने राजनाथ सिंह को नरन्द्र सिंह द्वारा उनके साथ किए गए र्दुव्‍यवहार के बार में बताया। प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष ने श्री यादव को आश्वस्त किया है कि इस बाबत वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बात करंगे।ड्ढr ड्ढr उनके आग्रह पर श्री यादव ने आत्मदाह की अपनी घोषणा वापस ले ली है। इस बाबत फोन पर श्री यादव ने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की इच्छा को वह टाल नहीं पाए। आखिर उनको अपने केन्द्रीय नेतृत्व के आश्वासन पर तो भरोसा करना ही होगा। हालांकि नरन्द्र सिंह को मंत्री पद से हटाने की अपनी मांग पर अब भी कायम हैं। केंद्र सरकार के सव्रे पर बवाल जारीड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। बिहार के सात अल्पसंख्यक बहुल जिलों की समस्याओं का पता लगाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा कराये गये सव्रे पर बवाल जारी है। केन्द्र सरकार ने एक स्वयंसेवी संगठन मानव विकास संस्थान (आईएचडी) को सव्रे की जिम्मेवारी दी थी। इस सव्रे को लेकर 26 जुलाई को हुई कार्यशाला में राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने इसे हकीकत से दूर करार दिया और अब प्रधानमंत्री 15 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के अलावा कई अन्य सामाजिक संगठनों ने भी इस सव्रे रिपोर्ट की हवा निकाल दी है। उल्लेखनीय है कि इसी सव्रे रिपोर्ट के आधार पर अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, सीतामढ़ी, पश्चिमी चम्पारण और दरभंगा में 523 करोड़ रुपये की योजना लागू करनी है। इस योजना में प्रमुख भूमिका निभाने वाली प्रधानमंत्री 15 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष मो. शरीफ कुरैशी ने कहा है कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि सव्रे टीम सात जिलों में कहीं गई है या नहीं। इंटरनेट पर कुछ जिलों की सव्रे रिपोर्ट जारी की गई है। इसे देखने पर लगता है कि वर्ष 2001 की जनगणना के आंकड़ों को रख दिया गया है। सव्रे रिपोर्ट में स्त्री शिक्षा पर दिया गया प्रतिवेदन भ्रामक है और इसी तरह सीमांचल क्षेत्रों में पेयजल समस्या को लेकर दिया गया प्रतिवेदन कागजी है।ड्ढr ड्ढr किशनगंज में अत्यधिक कुष्ठरोगी पाए जाते हैं और इनकी कोई चर्चा सव्रे रिपोर्ट में नहीं है। श्री कुरैशी ने कहा है कि सव्रे करने वालों ने किसी सामाजिक संगठन, पंचायती राज प्रतिनिधि और स्वयंसहायता समूहों से कोई मदद नहीं ली है। यह निर्देशों का उल्लंघन है और इस तरह की सव्रे रिपोर्ट के आधार पर कोई भी कार्यक्रम बनाना भयंकर भूल होगी।

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