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भाजपा के चुनावी अभियान को धक्का

विश्वास मत में कांग्रेस की जीत और भाजपा सांसदों के नोट लहराने की घटना के बाद भाजपा के चुनावी अभियान को धक्का लगा है। आसमान छूती महंगाई और यूपीए सरकार की विफलता को चुनावी मुद्दा के रूप में भंजाने की तैयारी में जुटी भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। देशव्यापी दलीय सव्रेक्षण के बाद भाजपा अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करना शुरू कर चुकी थी। जुलाई के अंत तक देश के अधिकतम लोकसभा सीटों के उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक हो जानी थी। किंतु लोकसभा की घटनाओं ने नये राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे दिया। भाजपा अब ऑफेंसिव से ज्यादा डिफेंसिव दिख रही है। भगवा ब्रिगेड के उत्साह पर फिलहाल पानी फिर गया दिखता है। अगले महीने लोकसभा का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। कम से कम सत्र तक भाजपा चुनावी रणनीति को गति देने की स्थिति में नहीं दिख रही है।ड्ढr यूपीए सरकार पर लगातार हमला करने और अपने पक्ष में हवा बनाने में सफल हो रही भाजपा के लिए लोकसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र अनुकूल नहीं रहा। कांग्रेस ने तिकड़मबाजी में ही सही बहुमत के अंकगणित को अपने पक्ष में कर लिया। लेकिन इस विशेष सत्र में असली हार तो भाजपा की हुई। उसके आठ सांसद समेत एनडीए फोल्ड के 12 सांसद दगा नहीं देते तो यूपीए सरकार सदन में ही गिर गयी होती। सत्ता पक्ष (275-12= 263) बनाम विपक्ष (256+12 =268)।ड्ढr तब देश में राजनीति की कुछ और ही फिाां होती। इसके अलावा भाजपा के तीन सांसदों का सदन के अंदर नोटों की गड्डियां लहराने की घटना से यूपीए से कहीं ज्यादा भाजपा को नुकसान हुआ है। भाजपा के अंदर शुचिता, ईमानदारी और पारदर्शिता का किस कदर क्षरण हुआ है, इससे पार्टी नेतृत्व के माथे चिंता की लकीरं साफ दिखायी दे रहीं हैं। भाजपा के अंदर चर्चा है कि पार्टी बदली राजनीतिक परिस्थितियों में अब नये सिर से अभियान को अमली जामा पहनायेगी। उसे फिलहाल यूपीए सरकार के पतन का इंतजार है।

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