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नशे की गिरफ्त में रांची के युवा

घटना एक : राकेश जी अपनी बहन के यहां बैठे थे। फोन की घंटी बजने पर उन्होंने फोन उठाया, तो सन्न रह गये। फोन उनके बेटे राजीव ने अपने हमउम्र फुफेर भाई को किया था। राजीव ने पूछा आज क्या प्रोग्राम है? एसा करते हैं, पहले थोड़ा-थोड़ा व्हिस्की लेंगे, फिर धुआं उड़ाने के दो घंटे बाद घर लौटेंगे। किसी को महक नहीं लगेगी।ड्ढr यह सुन कर राकेश जी के पांव तले की जमीन खिसक गयी। वे दोनों डीपीएस में 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं। राकेश जी को यह समझ में नहीं आ रहा था, अब वह अपने बच्चों को कैसे समझायें कि वह गलत रास्ते की ओर जा रहे हैं।ड्ढr घटना दो : लगभग एक साल पहले अरगोड़ा के पास कार दुर्घटना में दो टीन एजर्स लड़कों की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी। दोनों ही अच्छे घर के थे। इनमें से एक इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। मां बाप ने बड़े सपने पाल रखे थे। जो लड़का कार ड्राइव कर रहा था, वह दिन में ही शराब के नशे में धुत था। दुर्घटना में खुद तो गये ही, आज मां बाप जीते जी मर चुके हैं।ड्ढr रांची के अनेक युवा आज नशे की गिरफ्त में हैं। ये नशे के लिए शराब, गांजा, स्मैक और न जाने क्या क्या इस्तमाल कर रहे हैं। कुछ को घर से आसानी से पैसे मिल रहे हैं। जो इस नशे के आदि हो चुके हैं और घर से पैसे नहीं मिल रहे, हैं वे अब अपराध की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। शायद लक्की की हत्या के पीछे भी यही सार कारण रहें हों। झारखंड अलग राज्य बनने के बाद रांची में एक बारगी बाहरी बच्चों की भीड़ बढ़ गयी है। मां बाप अपने खून पसीने की कमाई खर्च कर इन बच्चों को भविष्य बनाने के लिए अच्छे कॉलेज या कोचिंग के लिए रांची भेज रहे हैं। लेकिन रांची की चकाचौंध और खराब संगति इन बच्चों को अंधेर कुएं में धकेल रहे हैं।ड्ढr रांची के कुछ खास इलाकों में पुलिस अगर छापामारी कर, तो बड़े ड्रग्स गिरोह का पर्दाफाश हो सकता है। रांची के स्टेशन रोड, पुरूलिया रोड का सदर अस्पताल इलाका, एयरपोर्ट, पीस रोड, लालपुर, मोरहाबादी, बहूबाजार, कांटाटोली इलाके में ड्रग्स का धंधा फल-फूल रहा है।

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  • Web Title: नशे की गिरफ्त में रांची के युवा