अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

एक रुपये की खातिर 30 साल तक लड़ी लड़ाई

हक की लड़ाई की एसी मिसाल शायद ही मिले। एचइसी के 24 कर्मियों ने वेतन वृद्धि में एक रुपये की कटौती के विरोध में एक-दो दिन नहीं, पूर 30 साल तक संघर्ष किया। मामला लेबर कोर्ट से लेकर हाइकोर्ट तक गया। एड़ियां घिस गयीं, लेकिन हक लेने का जज्बा नहीं मरा। इस दौरान पांच कर्मचारी स्वर्ग सिधार गये और बाकी सब रिटायर हो गये। अब एचइसी प्रबंधन कोर्ट के बाहर कर्मचारियों की यूनियन से समझौता कर उन्हें उनका हक देने पर सहमत हो गया है। समझौते के तहत कर्मियों को न्यूनतम एवं अधिकतम 60,573 रुपये का भुगतान प्रबंधन को करना होगा।ड्ढr हटिया कर्मचारी यूनियन के अनुसार 1.1.78 को इ ग्रेड से सी डी ग्रेड में प्रोमोशन होने पर वार्षिक वेतन वृद्धि आठ रुपये होनी थी। लेकिन यह सात रुपये हो गयी। इस कारण 500 मजदूरों को इसका नुकसान उठाना पड़ा। शुरू में ज्यादातर ने इसका विरोध किया, लेकिन मात्र एक रुपये की बात कह बाद में इसपर ध्यान नहीं दिया गया। लेकिन बाकी 24 मजदूरों ने इसकी शिकायत श्रम विभाग से की। श्रम विभाग ने प्रबंधन को गलती सुधारने को कहा। इसके बाद श्रम न्यायालय ने भी प्रबंधन को गलती सुधार कर भुगतान करने को कहा। इस आदेश के खिलाफ प्रबंधन हाइकोर्ट गया। हाइकोर्ट के सिंगल बेंच ने भी श्रम न्यायालय के आदेश को सही ठहराया। प्रबंधन फिर डबल बेंच में गया। यहां भी उसकी अपील खारिा हो गयी। बाद में हटिया मजदूर यूनियन ने प्रबंधन पर दबाव बनाया।ड्ढr इसके बाद प्रबंधन ने यूनियन के साथ द्विपक्षीय समझौता किया और बकाया भुगतान करने पर सहमति जतायी। कोर्ट में 24 लोग गये थे, इस कारण इसका लाभ इन्हीं को मिलेगा। सभी कर्मचारियों को उनकी बकाया राशि का चेक भेज दिया जायेगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: एक रुपये की खातिर 30 साल तक लड़ी लड़ाई