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भाजपा के सांसद ही बार-बार क्यों फंसते हैं?

भाजपा अपने को पार्टी विद द डिफरंस मानती है। अपनी चाल, चेहरा और चरित्र पर भाजपा खूब इतराती रही है। लेकिन अब यह सब बदल रहा है। लोकसभा के ताजा प्रकरण को देखें तो यूपीए सरकार बचाने में भाजपा सांसदों ने जो भूमिका निभायी है, जयचंदों को भी मात दे दी।ड्ढr जिन 12 सांसदों ने क्रॉस वोटिंग कर यूपीए सरकार को जीवन दान दिया, उनमें से छह अकेले भाजपा के हैं। पार्टी ने उन्हें दल से बर्खास्त कर दिया, लेकिन इसके कारण दल की साख पर जो बट्टा लगा है, उसे क्या धो पायेगी? वैसे यह कोई पहली घटना नहीं है। थोड़ा और पीछे चलें। इसी लोकसभा में वर्ष 2005 में हुए सांसद रिश्वतखोरी कांड में 10 सांसद बर्खास्त हुए थे, जिनमें छह अकेले भाजपा के थे। चार लोकसभा और दो राज्यसभा के माननीय सदस्य थे।ड्ढr 22 जुलाई को लोकसभा में भाजपा के तीन सांसदों को नोटों की गड्डियां लहराने की घटना लोग अभी भूले नहीं हैं। यह मामला ताजा है और अभी इसे कई जांच प्रक्रियाओं से गुजरना है। जब इसका खुलासा होगा तो शायद कई नये रहस्य उाागर होंगे। भाजपा इस घटना को किस नजरिये से लेती है, यह तो वही जाने लेकिन पूरा देश इसे एक सोची-समझी चाल के रूप में ही देख रहा है। इससे यूपीए की इज्जत पर बट्टा लगा हो या नहीं, लेकिन भाजपा की इज्जत- प्रतिष्ठा मेंकोई इजाफा नहीं हुआ है।ड्ढr झारखंड में भी भाजपा के तीन विधायक रिश्वतखोरी कांड से अभी तक बरी नहीं हुए हैं। विधानसभा की जांच समिति की रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आयी है।ड्ढr देश की जनता ने भाजपा के अध्यक्ष रहे बंगारू लक्ष्मण को कैमर के सामने रिश्वत लेते देखा। अभी कहां हैं बंगारू लक्ष्मण? शायद इतिहास के गर्त में समा चुके हैं। लेकिन भाजपा का चेहरा बिगाड़ कर उन्होंने पार्टी के संस्थापकों की आत्मा को जो पीड़ा पहुंचायी, उसकी अब तक भरपाई नहीं हो पायी है। एसा भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं का ही मानना है। 13वीं लोकसभा का कार्यकाल अभी छह महीना से ज्यादा बचा हुआ है। सरकार बचाने और गिराने को लेकर 21-22 जुलाई को जितने खेल हुए हैं, उनका अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। भाजपा की बदलती चाल, चरित्र और चेहरा देख कर देश भर में फैले कार्यकर्ताओं को जो पीड़ा पहुंच रही है, उसकी भरपाई कौन करगा?

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