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सेवा के नाम पर कांवरियों का शोषण

बलिया जिले के रानीगंज निवासी अमरजीत सिंह और नीरज सिंह पूछने से पहले ही भड़क जाते हैं, ‘ का पूछतऽ बाड़ऽ, देखत नईखऽ रास्ता में लूटत बाड़न सऽ ’। दोनों कक्षा नौ के छात्र हैं और कांवर लेकर देवघर जा रहे हैं। इन्हें दुख है कि कांवरिया पथ में शिवभक्तों को लूट रहे हैं दुकानदार। मनमाना दाम ले रहे हैं। अधिकतर कांवरियों की शिकायत है कि सेवा के नाम पर कांवरियों का शोषण किया जा रहा है। सूबे के मंत्री भले ही एक हर किमी पर धर्मशाला बनाने का दावा करते हों लेकिन असलियत यह है कि शिवभक्तों को सड़क किनार रात गुजारनी पड़ रही है। राहत की बात इतनी है कि कुछ स्वयंसेवी संगठन और स्थानीय लोग कांवरियों की सेवा में जुटे हैं।ड्ढr ड्ढr सुल्तानगंज से करीब 30 किमी दूर नहरमोड़, रामपुर में कांवरिया मुख्य सड़क छोड़ कांवरिया पथ की ओर मुड़ जाते हैं। वहां कांवरियों की भीड़ लगी हुई थी। अमरजीत और नीरज ने बताया कि रास्ते में शौचालय के चार रुपये, नीबू की चाय के चार रुपये और स्नान के लिए तीन रुपये लिए जा रहे हैं। उन्होंने शिकायती लहजे में कहा- आपलोग दुकानदारों से क्यों नहीं पूछते। कई कांवरियों ने बताया कि मासूमगंज के आगे 20 रुपये में इस शर्त पर चौकी मिलेगी कि आप वहां भोजन कीजिए। जिलेबिया मोड़ पर दिन में चौकी बुक कराने पर 25 रुपये और रात में 30 रुपये लिया जाता है। फलों की कीमत भी कहीं तय नहीं। महाराजगंज मधुकरपुर के सुरश चन्द्र और ब्रजेश कुमार ने बताया कि वह दो साल से जल चढ़ाने आते हैं लेकिन सामानों की मुंहमांगी कीमत ली जा रही है।ड्ढr ड्ढr सुल्तानगंज से लेकर देवघर तक रास्ते में कांवरियों की सेवा के लिए हजारों दुकानें सजी हुई हैं। यह सब सिर्फ कांवरियों को लुभाने के लिए। दरअसल यहां कांवरियों का शोषण हो रहा है। उनको दिया जा रहा भोजन घटिया किस्म का है। सामान की जांच और कीमतों की निगरानी के लिए कोई सरकारी एजेंसी कांवरिया पथ में नजर नहीं आती। दुकानों में सामान की कीमतों से संबंधित सरकारी बोर्ड भी नहीं दिखता। दुकानदार भीड़ को देखकर सामान की कीमत तय करते हैं। एक दुकानदार ने बताया कि कम भीड़ पर चौकी 20 रुपये में भी दी जाती है। भीड़ बढ़ने पर 25-30 रुपए वसूल लेते हैं।

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