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धरना पर बैठने के पहले ही भाजपा नेता गिरफ्तार

भाजपा के वरिष्ठ नेता और असम के पार्टी प्रभारी हरन्द्र प्रताप अपनी ही पार्टी के सत्ता में रहते गिरफ्तार कर लिए गए। विश्वविद्यालय कर्मियों की हड़ताल खत्म कराने में हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग को लेकर वह सोमवार से दो दिनों का मौनव्रत शुरू करने वाले थे। सुबह 8:30 बजे श्री प्रताप जैसे ही हाईकोर्ट के बगल में धरनास्थल पर पहुंचे, पुलिस ने उनको तम्बू-कनात समेत उठा लिया। नाराज श्री प्रताप ने अपना मौनव्रत कोतवाली थाने में ही शुरू कर दिया जो शाम को पुलिस द्वारा रिहा किए जाने के बाद भी चलता रहा।ड्ढr ड्ढr इस मुद्दे पर बिहार भाजपा में एक बार मतभेद दिखा और सरकार के खिलाफ झंडा उठाए श्री प्रताप से मिलने पूर्व मंत्री जनार्दन सिंह सीग्रीवाल, विधायक संजय सरावगी, अरुण सिन्हा, अनिल कुमार (हिसुआ), नितिन नवीन एवं प्रमरंजन पटेल, विधान पार्षद वीरकेश्वर सिंह, राजवंशी सिंह, रामकिशोर सिंह एवं नरन्द्र सिंह के अलावा मिथिलेश तिवारी, अरविन्द कुमार सिंह एवं रामचरित्र सिंह समेत कई भाजपा नेताओं के अलावा आरएसएस के दक्षिण बिहार प्रांत प्रचारक अनिल ठाकुर और कार्यालय प्रभारी राजेश भी थाने में पहुंचे। अपनी गिरफ्तारी से क्षुब्ध श्री प्रताप ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा है कि उनकी गिरफ्तारी ‘स्टेट स्पांसर्ड’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके द्वारा उठाए छात्रहित के मुद्दे पर सरकार को किरकिरी से बचाने के लिए उनको मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के इशार पर गिरफ्तार किया गया है। लिखकर सवालों का जवाब दे रहे श्री प्रताप ने कहा कि उनका मौनव्रत 30 जुलाई तक जारी रहेगा। श्री प्रताप ने बताया कि गिरफ्तारी की बाबत पुलिस का कहना था कि ‘ऊपर’ का आदेश है। वहीं प्रदेश नेतृत्व द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई के सवाल पर श्री प्रताप ने लिखकर बताया कि छात्रहित के मुद्दे पर उनको अपने अंजाम की परवाह नहीं है।

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