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आतंक का इस्तेमाल वोट बटोरने में भी

आतंकी घटनाएं, यहां तक कि आतंकवादी हमले की खबरं तक जनमत को प्रभावित करती है। विगत में स्पेन, इटली और फ्रांस के चुनाव इस बात के गवाह रहे हैं कि आतंकी धमाकों या धमाके होने की आशंका की खबरों से वहां सरकारों को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। बाबरी ध्वंस को भाजपा बेशक अधिकार की लड़ाई मानती हो, लेकिन एक समुदाय के लोग इसे आतंकी हमले के तौर पर देखते हैं। इस घटना के बाद भाजपा केन्द्र की सत्ता तक पहुंची। आतंकवाद के इर्द गिर्द वोट की अमर बेल फैलती है, भाजपा इस तथ्य को अच्छी तरह जानती है। आंतकवाद के बहाने भाजपा आंतरिक सुरक्षा को मुद्दा बनाना नहीं भूलती है। पार्टी को लगता है कि अब आतंकवाद की फसल काट कर ही वह सत्ता के शिखर तक पहुंच सकती है। इसी के चलते उसकी वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने बेंगलूरू और अहमदाबाद के बम धमाकों में केन्द्र की साजिश तक का आरोप लगा दिया। पार्टी का मानना है कि यूपीए सरकार की आतंकवाद के प्रति नरम नीति के चलते ही देश में आतंकी वारदातें बढ़ रही हैं। पार्टी का मानना है कि यूपीए सरकार ने आतंकवाद से लड़ने वाले कानून पोटा को हटाकर आतंकियों के मनोबल को बढ़ाया है। इस कानून के हटने से सुरक्षा बलों के हौसले टूटे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि वोट बैंक की राजनीति ने आंतरिक सुरक्षा को तबाह कर दिया है। बेंगलूरू और अहमदाबाद के धमाके उसी का नतीजा हैं। महाराष्ट्र के मकोका की तर्ज पर गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान की सरकारों ने कानून बनाने के अध्यादेश पारित कर केन्द्र को भेज रखे हैं, लेकिन उन्हें संवैधानिक जामा नहीं पहनाया जा रहा है। पार्टी ने दावा किया है कि बीते चार साल में 70 से अधिक आतंकी हमले हुये, लेकिन एक में भी दोषी को सजा नहीं मिली। इन हमलों में 600 से अधिक बेगुनाह मार गये। पोटा कानून के बावजूद संसद पर हुये हमले पर पार्टी का कहना है कि हमने एक भी हमलावार को जिंदा नहीं छोड़ा। इसी तरह गुजरात के अक्षरधाम मंदिर से लेकर जम्मू के रघुनाथ मंदिर पर हुये हमलों में हमने आतंकियों को उनकी जगह दिखा दी थी।

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  • Web Title: आतंक का इस्तेमाल वोट बटोरने में भी