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शिक्षा विभाग में प्रोमोशन घोटाला

शिक्षा विभाग में प्रोमोशन घोटाले की परतें खुलने लगी है। दुमका प्रमंडल के बाद रांची में भी गलत प्रोमोशन दिये जाने का मामला प्रकाश में आया है। प्रथम दृष्टया मामले की जांच में तकरीबन दस करोड़ रुपये की चपत लगने की बात सामने आयी है। विभाग इसकी जांच कर रहा है। वित्त विभाग ने भी इस पर आपत्ति जतायी है। शिक्षकों के लिए बीएससी प्रशिक्षित का वेतनमान निर्धारित करने में नियमों को ताक पर रखा गया। तत्कालीन डीएसइ पर पैरवी, पहुंच और पैसे के बल पर गलत तरीके से प्रोमोशन देने का आरोप है। गलत प्रोमोशन देने के कारण दुमका प्रमंडल में 40 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना सरकार को लगा था। वैसे, विभागीय निर्देश के बाद इसकी वसूली शुरू हो गयी है।ड्ढr उच्च योग्यताधारी के अनट्रेंड रहते हुए भी उनकी नियुक्ति मैट्रिक ट्रेंड पद पर हो गयी। 1तक निर्धारित वेतन मिलता रहा। 1े बाद से वेतन निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन शिक्षा पदाधिकारियों ने वेतन निर्धारण के नाम पर खूब खेल किया। नियमों को ताक पर रखकर अनट्रेंड को ट्रेंड का एवं ट्रेंड शिक्षकों को बीएससी प्रशिक्षित का वेतनमान दे दिया। यह सिलसिला 1तक चलता रहा। डीएसइ प्रदीप चौबे ने इस संदर्भ में बताया कि इस तरह के मामले सामने आये हैं। इसकी जांच की जा रही है।

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