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झारखंड में मलेरिया के केस में 50 फीसदी सेरब्रल

रिम्स के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अमर कुमार वर्मा ने सेरेब्रल मलेरिया पर शोध कर सरकारी दावे की पोल खोल दी है। उनका कहना है कि यहां मलेरिया के जो भी मामले होते हैं, उनमें 50 फीसदी सेरब्रल मलेरिया होते हैं। अपना शोध पत्र वह जयपुर में एक से तीन अगस्त तक होनेवाले राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत करनेवाले हैं। इसमें उन्होंने दो खास मशीनों और दो कारगर दवाओं का जिक्र किया है, जो चाइनीज पौधों से बनती हैं। राष्ट्रीय सेमिनार में इसे प्रस्तुत किये जाने के बाद इस पर चर्चा होगी। डॉ वर्मा ने कहा कि सेरब्रल मलेरिया से पीड़ित का इलाज 30 मिनट के अंदर शुरू होना चाहिए। 0 मिनट देर होने के बाद पीड़ित को बचाना मुश्किल है। उन्होंने अमेरिका दो मशीनें मंगवाई हैं, जो विभाग में मौजूद हैं। सेरब्रल मलेरिया के इलाज में ऑर्टिमेसिया इबोना नामक दवा ही कारगर होती है। इसका सही इलाज नहीं होने से इससे किडनी, लीवर और दिमाग पर विपरीत असर पड़ता है। अपार्टमेंट तोड़ने के लिए आदेश पत्र जारीएक माह तक चलेगा अभियानड्ढr

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