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परमाणु करारा बिजली उत्पादन के लिए जरूरी: जयराम रमेश

वर्ष 2020 तक 20 हाार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है जो देश के कुल बिजली उत्पादन का 6 फीसदी होगा। उन्होंने कहा कि परमाणु करार देश हित में है। चंद्रपुरा थर्मल प्लांट का निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि झारखंड एसा इकलौता राज्य है जहां 40 साल से यूरनियम निकाला जा रहा है। देश में इसका अभाव है। देश के परमाणु बिजली घर 45 फीसदी क्षमता पर चलाये जा रहे हैं। 25 फीसदी यूरनियम आंध्रप्रदेश में तथा 20 फीसदी मेघालय में है। मगर वहां चल रहे आंदोलन के कारण हम उसे मंगा नहीं पा रहे हैं। यदि अंतर्राष्ट्रीय समझौता होता है तो हम आस्ट्रेलिया, कनाड़ा से इसे मंगा सकते हैं। मंत्री श्री रमेश ने डीवीसी के संबंध में बताया कि अभी इसकी बिजली उत्पादन क्षमता 24 सौ मेगावाट करने की है। मंत्री ने कहा कि डीवीसी चंद्रपुरा, बोकारो थर्मल, बोकारो स्टील, कोडरमा, मैथन में 37 सौ मेगावाट का पावर प्लांट लगा रहा है जिसमें 14 हाार करोड़ रुपये खर्च होंगे।ड्ढr उन्होंने बताया कि डीवीसी रांची में अपना एक कार्यालय खोलेगा जिसमें सीनियर डायरक्टर की नियुक्ित होगी और इन्हीं के जिम्मे झारखंड के पावर प्लांट रहेंगे। सीएम से इसके लिए करीब तीन एकड़ जमीन की मांग की गयी है। उन्होंने बताया कि डीवीसी चंद्रपुरा एवं कोडरमा में औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र खोलेगा तथा बोकारो एवं हाारीबाग स्थित राज्य सरकार के आइटीआइ का आधुनिकीकरण करगा। उन्होंने कहा कि झारखंड के बेरोगारों को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्कील्ड बनाना है ताकि वे कहीं भी रोगार प्राप्त कर सकें।ड्ढr एक प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि दक्षिण भारत में बिजली की स्थिति दयनीय है। हम पावर प्लांट समय पर कमीशनिंग नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने आशा जतायी कि चंद्रपुरा थर्मल की यूनिट संख्या 7 फरवरी 0तक कॉमर्शियल लोड में तथा 8 यूनिट की अप्रैल 0तक कमीशनिंग हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 12 वीं पंचवर्षीय योजना में भी डीवीसी कई पावर प्लांटों का लगायेगा। पत्रकार वार्ता के दौरान डीवीसी के चेयरमैन एके बर्मन, सचिव एस विश्वास, इंटक के राष्ट्रीय महासचिव राजेन्द्र प्रसाद सिंह उपस्थित थे।

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  • Web Title: परमाणु करारा बिजली उत्पादन के लिए जरूरी: जयराम रमेश