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ओआरएस दिवस पर रैली निकाली

इंडियन एकेडमी ऑफ पेडियाट्रिक (आईएपी) ने बच्चों में डायरिया होने पर जीवन रक्षक घोल (ओआरएस) पिलाने का परामर्श दिया है। मंगलवार को आयोजित परिचर्चा में शामिल विशेषज्ञों का कहना था कि इससे डायरिया से होनेवाली मौत को भी कम किया जा सकता है। ओआरएस दिवस पर जागरुकता के लिए सुबह रैली निकाली गयी जिसे स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। परिचर्चा को संबोधित करते हुए डा.जे.पी.एन.वर्णवाल और डा.अलका सिंह ने कहा कि डायरिया होने पर शरीर से खनिज-लवण की मात्रा निकल जाती है। इसकी भरपायी के लिए नमक-पानी का उचित मात्रा में मिश्रण पिलाया जाता है।ड्ढr ड्ढr डा.एन.पी.नारायण का कहना था कि डायरिया में पहली दवा के रूप में ओआरएस का परामर्श देना चाहिए। डायरिया से बचाव के लिए ओआरएस सभी दुकानों में सर्व सुलभ होना चाहिए। यूनिसेफ के डा.सेरीन वर्की का कहना था कि डायरिया होने पर नवजात बच्चों को स्तनपान और ओआरएस घोल देना आवश्यक है। डा.संजाता राय चौधरी ने बताया कि डायरिया होने पर चावल के मांड में हल्का नमक देने से लाभ मिलता है। डा.अखिलानंद ठाकुर ने ओआरएस और एंटीबायोटिक के लाभ पर अलग अध्ययन करने की बात कही। परिचर्चा का संचालन करते हुए आईएपी की सचिव डा.नीलम वर्मा ने बताया कि डायरिया की रोकथाम में ओआरएस असरदार है। इसके प्रयोग से बच्चों की होनेवाली मौत में काफी कमी आयी है। इस मौके पर शिशु रोग विशेषज्ञ डा. ए.के.ठाकुर भी मौजूद थे।

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