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होम लोन होगा और महंगा

उद्योग जगत की ब्याज दरें नहीं बढ़ाने के आग्रह को दरकिनार करते हुए रिजर्व बैंक ने महंगाई पर शिकंजा और कसने के लिए नकद आरक्षित अनुमान (सीआरआर) में चौथाई और रेपो दर में आधा प्रतिशत वृद्धि कर दी। केन्द्रीय बैंक के इस निर्णय से बैंकों का ऋण और महंगा होगा तथा बाजार में मांग ठंडी पड़ेगी। बैंक ने यह निर्णय ऐसे समय किया है जबकि मुद्रास्फीति की दर 12 प्रतिशत के करीब चल रही है जो 13 वर्ष के उच्चतम स्तर पर है। वर्ष 2008-0ी ऋण एवं मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा में आरबीआई ने ऋणों का प्रवाह कम करने के लिए बैंकों के लिए निर्धारित सीआरआर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर प्रतिशत कर दिया है। यह वृद्धि 30 अगस्त के पखवाड़े से प्रभावी होगी।ड्ढr ड्ढr वहीं अल्पकालिक ब्याज दर रेपो को 0.50 प्रतिशत बढ़ाकर उसे भी प्रतिशत पर ला दिया गया है। यह वृद्धि तुरंत प्रभाव से लागू होगी। इससे बैंकिंग तंत्र में ऋण योग्य धन घटेगा तथा बैंकों के पैसे की लागत बढ़ेगी जिससे गृह ऋण आदि की ब्याज दरों में और वृद्धि होगी। विश्लेषकों के अनुसार बैंकों के बैंचमार्क प्रधान ब्याज दर (बीपीएलआर) में वृद्धि के साथ ही आवास ऋण, वाहन ऋण और अन्य सभी तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे। आरबीआई के गवर्नर वाईवी रेड्डी न कहा कि नीति में खासकर मुद्रास्फीति की दर को घटाकर मार्च 200तक सात फीसदी पर लाने पर जोर दिया गया है जो फिलहाल 11-12 फीसदी पर है। बैंक ने वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान साढ़े आठ प्रतिशत से घटाकर आठ प्रतिशत कर दिया।

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