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पाक फौचा में नहीं भिड़ने की क्षमता

पाकिस्तान में बिगड़ते हालात और तालिबान की बढ़ती ताकत के बावजूद फौा की चुप्पी विशेषज्ञों को परशान किए हुए है। अमेरिका भी पाकिस्तान के ताजा हालात से काफी उलझन में है और अपनी अफ-पाक नीति के तहत विशेषज्ञों के साथ हालात की समीक्षा कर रहा है। जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान अमेरिका को भारत का हव्वा दिखा कर भरपूर तरीके से बेवकूफ बना रहा है। यहां पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल वी.पी.मलिक ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि संभवत: पाकिस्तानी सेना हस्तक्षेप करने के मूड में नहीं या उसके पास तालिबान से निपटने की क्षमता नहीं है या दोनों बातें नहीं हैं। फिर भी घर में आग लगी होने के बावजूद पाकिस्तानी फौा अब भी कश्मीर का राग अलाप रही है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि निकट भविष्य में पाकिस्तान के हालात और बिगड़ेंगे। उधर, पाकिस्तान आतंक के खिलाफ जंग के नाम पर भारत पर अमेरिकी दबाव डलवाना चाहता है। इन्ही मजबूरियों के चलते अमेरिका चाहता है कि भारत पाकिस्तान से बातचीत का सिलसिला शुरू कर। लेकिन भारत अमेरिका के आग्रह को मानने के मूड में नहीं है। रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल अफसीर करीम का मत है कि पाकिस्तान सरकार और फौा को शरीयत लागू करने की तालिबान की कोशिशों से कोई गुरा नहीं है। शरीयत कानून लागू करना पाकिस्तान के संविधान का हिस्सा है। हां, यदि एसे कानून लाहौर, कराची या इस्लामाबाद में लागू किए जाने की नौबत आती है या तालिबान पूर पाकिस्तान का तालिबानीकरण करने पर अड़ते हैं तब शायद फौा को हस्तक्षेप करना पड़े। फिलहाल निजामे अदल लागू करने को सरकार की मंजूरी के बाद उपद्रवग्रस्त स्वात और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में शांति बहाल होने से फौा राहत की सांस ले रही है। जनरल करीम के मुताबिक अमेरिका भी समझ गया है कि पाकिस्तान के हालात सुधरने की कोई उम्मीद नहीं है। हाल ही में राष्ट्रपति ओबामा के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रूक ने भी कहा है कि पाकिस्तान के सुधरने की कोई उम्मीद नहीं है।

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