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डब्ल्यूटीओ वार्ता विफल, आरोप-प्रत्यारोप शुरू

बड़ी-बड़ी उम्मीदों के साथ सप्ताह भर पहले शुरू हुई डब्ल्यूटीओ मिनी मिनिस्टीरियल के आखिरकार ढाक के तीन पात साबित होने के बाद सदस्य देशों के बीच एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। फिलहाल भारत ने इन वार्ताओं के बेनतीजा रहने के लिए विकसित देशों के सिर दोष मढ़ा है और साथ ही यह भी कहा है कि इन वार्ताओं के फिलहाल बेनतीजा होने का यह मतलब नहीं है कि आगे अब कोई उम्मीद गायब हो गई है। इसे महा एक ठहराव के रूप में देखा जाना चाहिये। वहीं दूसरी ओर अमेरिका और यूरोपीय संघ ने वार्ताओं के विफल होने के लिए विकाससील देशों को जिम्मेदार ठहाराया है। वाणिज्य मंत्री कमलनाथ के मुताबिक विकसित देशों की ओर से सब्सिडी और कृषि व गैर-कृषि उत्पादों पर विकसित देशों के हठधर्मी रवैये के चलते ही इतने दिनों की कवायद का कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ सका है। लेकिन इससे निराश होने की जरूरत नहीं है। यह प्रक्रिया आगे भी बदस्तूर जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत ने कृषि क्षेत्र में विकसित देशों की सब्सिडी कम करने के साथ ही अपने संवेदनशील कृषि उत्पादों और विशेष संरक्षण उपायों को लेकर अपना पक्ष मजबूती के साथ रखा लेकिन विकसित देश संरक्षणवादी मानसिकता में ही उलझे रहे। ध्यान रहे कि कृषि के विशेष उत्पाद खाद्यान्न निर्भरता और किसानों की आजीविका से जुड़े हैं जबकि विशेष संरक्षण उपाय यानी एसएसएम जिंसों के अंतरराष्ट्रीय मूल्य व्यवस्था, प्राकृतिक आपदा और डंपिंग जसे मसलों से निपटने के लिए हैं। कमलनाथ के मुताबिक कृषि क्षेत्र के एसएसएम के अलावा अन्य कई अहम मसलों पर व्यापार मंत्रियों के बीच सहमति उभरकर आई है। आगे की वार्ताओं के दौरान सहमतियों के ये बिंदु बने रहेंगे और वार्ता इसके अगली कड़ी के रूप में होगी। मैं डब्ल्यूटीओ महानिदेशक पास्कल लॉमी से यही गुजारिश करूंगा कि वे इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद करंे।

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