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खाली हाथ लौटे वोहरा

तीन दिनों तक राजधानी में रहने के बाद जम्मू-कश्मीर के रायपाल एन.एन.वोहरा मंगलवार को खाली हाथ श्रीनगर लौट गए। केन्द्र सरकार ने उनके इस आग्रह को मानने से इंकार कर दिया कि उन्हें राय शासन को चलाने के लिए किसी सलाहकार की जरूरत नहीं है। उन्होंने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान इस बात की जोरदार तरीके से वकालत की। उन्होंने गृह मंत्री शिवराज पाटिल के साथ अपनी मुलाकात के दौरान भी यही कहा,लेकिन पाटिल की राय उनसे अलग थी। उन्होंने यहां राय की ताजा स्थिति पर प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह व गृह सचिव मधुकर गुप्ता से भी विस्तार से चर्चा की। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि केन्द्र ने रायपाल के दो सलाहकार नियुक्त करने का मन बना लिया है। राय के पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर आईएएस अधिकारी सुधीर गुलेरिया का सलाहकार बनना तय माना जा रहा है। दूसरे नाम पर भी विचार जारी है। दरअसल सरकार सलाहकार इसलिए नियुक्त करना चाह रही है, ताकि वे वोहरा को राय में आगामी अक्तूबर में होने वाले विधान सभा चुनाव के समय खासतौर पर सहयोग कर सकें। अभी तक पूरे राय प्रशासन को रायपाल और राय के मुख्य सचिव ही देख रहे हैं। सरकार सारी शक्ितयां सिर्फ दो ही व्यक्ितयों के इर्द-गिर्द सिमटने को भी सही नहीं मान रही। उधर, केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री सैफुउद्दीन सोज सरकार से बार-बार मांग कर रहे हैं कि रायपाल के लिएकश्मीर जसे जटिल सूबे को अके ले देख लेना नामुमकिन है। इसलिए उन्हें सलाहकार मिलने चाहिए। वे अपनी इस मांग को प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के सामने भी रख चुके हैं। जानकार कह रहे हैं कि सोज की मांग के चलते ही वोहरा की सलाह को नहीं माना गया। इस बीच, पता चला है कि वोहरा ने दिल्ली में नेताओं को यह भी बताया कि जम्मू में निरंतर चल रहे आंदोलन के चलते राय की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों को भी भारी असुविधा हो रही है। बीते कुछेक दिनों से आंदोलनकारियों ने कश्मीर घाटी और लद्धाख में पेट्रोल और डीजल लेकर जाने वाले ट्रकों का भी चक्का जाम कर दिया है। इसके चलते हालात बदतर हो सकते हैं।

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