अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

..जब सूख जाएंगी गंगा-ब्रह्मपुत्र

आतंकवाद का खतरा बढ़ चुका है। लेकिन जलवायु पर्वितन का खतरा धीरे-धीरे बढ़ रहा है। हर साल हजारों लोग आतंकवाद की भेंट चढ़ जाते हैं। लेकिन सोचिए जरा ग्लोबल वार्मिग से 2050 में क्या होगा जब गंगा-यमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियां सूख जाएंगी। यदि रहीं भी तो एक छोटी नहर से यादा उनका अस्तित्व नहीं होगा। आशंका है कि तब तक समुद्र का जलस्तर डेढ़ फीट बढ़ जाएगा। मुंबई में समुद्र का पानी गेटवे ऑफ इंडिया तक पहुंच जाएगा और शाहरुख खान का बांग्ला ‘मन्नत’ जलसमाधि ले लेगा? ये जलवायु पर्वितन के संभावित खतरों की कुछ ऐसे हौलनाक नजारे होंगे जिन्हें एक फिल्म के जरिये लोगों को दिखाने की योजना है। ताकि इन खतरों को कम करने में हर नागरिक रुचि ले। अर्थ साइंस मंत्रालय जलवायु परिवर्तन के खतरों के प्रति लोगों को आगाह करने के लिए इस फिल्म का निर्माण करेगा। कुछ समय पूर्व एक ऐसी ही साइंस फिल्म ‘गरम हवा’ का निर्माण किया गया था। लेकिन यह आम लोगों तक नहीं पहुंच पायी। इसका वही हश्र हुआ जो अमूमन डाक्टूमेंट्ररी फिल्म का होता है। इसलिए अब मंत्रालय की कोशिश है कि फिल्म सिर्फ सांइटिफिक ही नहीं मनोरंजक भी हो और आम लोगों तक पहुंच बनाए। ताकि फिल्म का असल संदेश लोगों में पहुंचे। विज्ञान, प्रौद्यौगिकी तथा अर्थ साइंस मंत्री कपिल सिब्बल के अनुसार हम प्रोफेशनल फिल्म निर्माताओं की मदद से इस फिल्म का निर्माण करेंगे। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। मकसद है कि फिल्म देखने के बाद हर व्यक्ित जलवायु पर्वितन के खतरों को कम करने में अपनी भूमिका को समझे और निभाए। मंत्रालय के अनुसार इस बारे में नेशनल जियोग्राफिक चैनल के अलावा बालीवुड के भी कुछ बड़े निर्माताओं से बातचीत किए जाने की संभावना है। वैसे, तो ऐसी फिल्म बनाने में नेशनल जियोग्राफिक चैनल के विशेषज्ञों को महारत हासिल है। लेकिन अभी मंत्रालय ने लीक से हटकर सोचते हुए इसे बड़े पर्दे की फिल्म बनाने का विकल्प भी खुला रखा हुआ है। बड़े पर्दे की फिल्म में बजट की समस्या आड़े आ सकती है इसलिए मंत्रालय कुछ सफल बजट फिल्मों का भी अध्ययन कर रहा है।ं

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: ..जब सूख जाएंगी गंगा-ब्रह्मपुत्र