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डिमांड गुरुचाी का चोला मंराडी

ेंद्र को झामुमो प्रमुख शिबू सोरन ने जो मांगों की सूची सौंपी है वह बाहरी चोला है। अंदर कुछ और है। जब श्री सोरन केंद्र में मंत्री थे तो कभी कोल इंडिया, डीवीसी या वृहत झारखंड की बात नहीं कही। छह माह के अंदर चुनाव होने हैं। इसलिए जनता को दिखाने के लिए कुछ तो चाहिए। इसीलिए केंद्र के साथ हुई सौदेबाजी को अलग रूप देने के लिए मांग पत्र का चोला ओढ़ लिया। सौदेबाजी ने कांग्रेस, भाजपा और झामुमो सरीखे कई पार्टियों की कलई खोल दी है। कांग्रेस खरीददार और भाजपा-झामुमो बिकाऊ पार्टी बनकर उभर हैं। भाजपा के तो काफी सांसद बिके। यह बात जेवीएम सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने बुधवार को यहां कही। वे पार्टी के सम्मेलन में भाग लेने आये हुए थे। उन्होंने कहा कि उनसे भी सरकार बचाने के लिए समर्थन मांगा गया था। परमाणु करार बड़ी बात है। जल्दबाजी क्यों। गुण-दोष पर बहस के बाद जो देशहित में होता निर्णय लिया जाता। उन्होंने कहा कि झारखंड के विकास के लिए राज्य में दिल्ली के प्रभाव को कम करना जरुरी है।

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