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आज एटमी करार की होगी परीक्षा

भारत के लिए एक बार फिर परीक्षा की घड़ी नजदीक है। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद वो दिन आ ही गया जिसके लिए मनमोहन सिंह सरकार को विश्वास मत की अग्निपरीक्षा देनी पड़ी थी। 1 अगस्त यानि शुक्रवार को विवादास्पद भारत-अमेरिकी परमाणु करार को हरी झंडी देने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊरा बोर्ड की बैठक होनी है। बैठक में क्या होगा, यही तय करगा कि भारत करार की राह पर आगे चल पाता है या नहीं। भारत के लिए यह सब चुनौती के साथ-साथ रोमांच भरा कदम भी होगा क्योंकि पोखरण विस्फोट के 34 साल बाद अब जाकर वह परमाणु मसले पर किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर विचार-विमर्श का केंद्र बनने जा रहा है।ड्ढr ड्ढr तब परीक्षण के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मसले पर भारत को अछूत की तरह समझा जाता था। वियना में होने वाली इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजरं टिकी हुई है। बैठक शुरू होने से पहले ही विरोध के सुर सुनाई देने लगे हैं। यूरोप के कुछ देश ने जहां सेफगार्ड एग्रीमेंट में कुछ मुद्दे पर आपत्ति जताई है वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान ने भी अमेरिका से अपने साथ भी वैसा ही करार किए जाने की मांग कर विरोध के तार छेड़ दिए हैं। ऐसे में शुक्रवार को होने वाली बैठक में विरोध के इन सुरों को कितनी हवा मिलेगी यह तो अभी रहस्य के गर्त में है पर यह तो तय है कि आसानी से इसे हरी झंडी नहीं मिलेगी। हालांकि भारत ने भी अपनी ओर से सदस्य देशों को मनाने के लिए पूरी कोशिश शुरू कर दी है। परमाणु ऊरा आयोग के चेयरमैन अनिल काकोदकर पहले ही वियना में हैं और मनाने के प्रयास चल रहे हैं।ड्ढr जिस हॉल में बैठक होनी है उसे भारतीय संस्कृति के हिसाब से सजाया गया है। दीवारों पर रामायण और महाभारत के दृश्य लगाए गए हैं। हालांकि अभी पूर करार की राह में कई बाधाएं हैं मगर सबसे बड़ी और पहली बाधा आईएईए द्वारा इसे हरी झंडी मिलना है।

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