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चुनाव बाद की हिंसा रोकने को बन रही रणनीति

चुनाव के बाद भी अतिवादी संगठन अपने प्रभाव क्षेत्र में उत्पात मचा सकते हैं। इस बात की आशंका जाहिर की जाने लगी है। पहले चरण में जिन नक्सल प्रभावित इलाकों में मतदान कराए गए हैं वहां चुनाव बाद की स्थिति क्या होगी अभी से इसका आकलन किया जा रहा है। पूर्व के अनुभवों को ध्यान में रखकर सुरक्षा एजेंसियां आगे की रणनीति बनाने में जुट गयी हैं। मतदान के बाद आमतौर पर हिंसा की आशंका बनी रहती है। बीते विधान सभा और लोकसभा चुनावों में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इस बार लोकसभा चुनाव में पहले चरण में जिन क्षेत्रों में मतदान कराए गए हैं वहां यह खतरा ज्यादा महसूस किया जा रहा है।ड्ढr ड्ढr पहले चरण के मतदान के दौरान और उससे पहले नक्सलियों ने जिस तरह सुरक्षा बलों और बूथों पर हमला बोला उससे यह खतरा और बढ़ गया है। मतदान के दिन गया के सिंधुपुर में नक्सलियों ने बूथ पर हमला कर दो जवानों को मार डाला। उसी दिन बाराचट्टी और रोहतास के कोरियरी में आईटीबीपी और बीएसएफ के साथ जबरदस्त मुठभेड़ हुई। इसके पहले रोहतास के ही धनसा में बीएसएफ के कैम्प पर राकेट लांचर से हमला किया गया। सुरक्षा एजेंसियां यह मानकर चल रही हैं कि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की फिराक में लगे हैं और यह खतरा चुनाव बाद भी बना रहेगा। इसको ध्यान में रखकर संबंधित क्षेत्रों में चुनाव बाद सुरक्षा बलों की तैनाती की रणनीति अभी से ही बनायी जा रही है। केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों की रवानगी के बाद राज्य सरकार अपने सुरक्षा संसाधनों का उपयोग करगी। बिहार मिलिट्री पुलिस(बीएमपी) और सैप के अलावा डीएपी को केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों से रिप्लेस किया जाएगा।

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