DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बीआरचाीएफ के पैसे को लेकर बवाल

अब पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआराीएफ) के पैसे को लेकर जिलों में बवाल शुरू हो गया है। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच इस मसले को लेकर नया मोर्चा खुल गया है। इस बवाल की आंच राजधानी तक पहुंचने लगी है। 31 जुलाई को दर्जनों मुखिया पंचायती राज मंत्री हरि प्रसाद साह के पास पहुंचे और गुहार लगाई कि बीआराीएफ के पैसे बैंक से बाहर नहीं निकल रहे हैं। इसके कारण ग्राम सभा से पारित विकास योजनाएं लागू नहीं हो रही हैं। मुखियों का कहना था कि बीआराीएफ के पैसे से पंचायत सरकार भवन बनाने के लिए दबाव बन रहा है।ड्ढr ड्ढr भवन के निर्माण की लागत लगभग 45 लाख रुपये है। बीआराीएफ से उन्हें लगभग सात लाख रुपये एक वर्ष के लिए मिल रहे हैं। तीन वर्ष के बाद ग्राम पंचायतों के चुनाव होने हैं। इस लिहाज से किसी भी मुखिया के कार्यकाल में अधिकतम 21 लाख रुपये ही मिल पायेंगे। इससे पंचायत सरकार भवन का निर्माण पूरा होने वाला नहीं है। अब मुखिया इस राशि का उपयोग पंचायतों की समस्याओं के समाधान में करना चाहते हैं ताकि अगले चुनाव में उन्हें इसका फायदा मिल सके। पंचायती राज विभाग के आधिकारिक सूत्र भी मुखियों की समस्या से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम सभाओं ने पंचायत की समस्याओं से जुड़ी अपनी योजना बनाकर भेजी जरूर लेकिन जिला परिषद पहुंचते-पहुंचते इसमें पंचायत सरकार भवन का मसला जुड़ गया। इसके कारण अब बीआराीफ का पैसा उन्हें नहीं मिल पा रहा है। वैसे मंत्री ने मुखियों को आश्वासन दिया है कि उनकी समस्याओं को लेकर वे अधिकारियों से बात करंेगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: बीआरचाीएफ के पैसे को लेकर बवाल