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हड़ताल! हड़ताल! हड़ताल!

अपना बिहार एक हड़ताल प्रधान प्रदेश है। पहले ये कृषि प्रधान हुआ करता था। किसान आज भी हैं लेकिन अब वे दूसर प्रदेशों को कृषि प्रधान बनाने में लगे हुए हैं। अपना प्रदेश नेता प्रधान भी है। बल्कि कुछ लोगों का प्रोफेशन ही है राजनीति। अपराध प्रधान प्रदेश के रूप में सूबा बरसों से प्रसिद्ध है। खास बात ये है कि अपने यहां हर समय कोई न कोई हड़ताल चलती रहती है, जसे बनारस के मणिकर्णिका घाट पर कोई न कोई चिता जलती रहती है।ड्ढr ड्ढr हड़ताल जागरूक समाज की निशानी है। इस लिहाज से हमारा समाज इस हद तक जागरूक है कि जागना उसकी आदत बन गई है। कभी बिजली न आने पर जागता है। कभी पानी उसकी आंखों की नींद छीन लेता है। आजकल जलजमाव और अपराधी समाज को जागरूक बनाए हैं। अपने प्रदेश में सोने का काम या तो पुलिस करती है या अफसर। पिछले दिनों बड़े- बड़े अफसरों के तबादले हुए थे, तब सब जागे थे। मनपसंद जगह पाने वाले तो फिर से सो गए, बाकी की नींद भाग गई है। आजकल पुलिस के सोने का टर्न है तो अपराधी जाग गए हैं। कहते हैं कि बेईमानी का धंधा ईमानदारी से किया जाता है। लेकिन, अपराधी दोहरा चरित्र जीते हैं। सोने की बारी आने पर भी सार के सार नहीं सो जाते। कुछ जागते भी रहते हैं। और, अपनी सीधी- सादी पुलिस, पूरी की पूरी सो जाती है। बात हड़ताल की चल रही थी। आजकल गैर शिक्षकेतर कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसके बाद अगर कालेज खुल गए तो छात्र आंदोलन या हड़ताल की योजना बना सकते हैं। बचे बेचार शिक्षक तो उन्होंने ही क्या गुनाह किया है कि हड़ताल नहीं कर सकते। कितने दिन हो गए हड़ताल किए हुए। सफाई कर्मचारी बरसात बीतने का इंतजार कर रहे हैं। बरसात में सफाई से क्या फायदा। दीवाली और छठ में थोड़ा समय है। उस समय सफाई का महत्व है लेकिन वही समय कर्मचारियों की हड़ताल के लिए मुकर्रर है।ड्ढr ड्ढr डाक्टरों, नर्सो और अस्पताल कर्मचारियों की हड़तालें धारावाहिक रूप से चलती हैं। एकता कपूर चाहें तो एक नया सीरियल इन्हीं पर बना सकती हैं। कहां तक गिनाएं। यहां तो हर विभाग में हड़ताल प्रेमी लोग मौजूद हैं। इसीलिए राजधानी पटना के एक चौराहे का नाम ही हड़ताली चौक रख दिया गया है। हड़तालों से काफी गहरा नाता है हमारा। फिर भी कहा जा रहा है कि विकास हो रहा है। क्या इतनी कूवत है किसी और राज्य में। दिल्ली और मुंबई में बस हड़ताल हो जाती है तो सब मुंह बा देते हैं। लेकिन हम.. हम उस सूबे के वासी हैं, जहां हड़तालें भी होती हैं और विकास भी।ं

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