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शुल्क वरीयता स्कीम 2011 तक जारी रखेगा यूरोप

डब्ल्यूटीओ वार्ताओं के तहत कृषि सहित विभिन्न मसलों पर भले ही भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच भारी टकराव हों लेकिन ईयू ने द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों का ध्यान रखते हुये भारत के लिए शुल्क दरों में वरीयता स्कीम को न सिर्फ जारी रखने का फैसला किया है बल्कि इसे वर्ष 2011 तक के लिए बढ़ाने की भी घोषणा की है। इसके तहत भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यातकों को विशेष लाभ होने की उम्मीद की जा रही है। डब्ल्यूटीओ के स्तर पर टकरावों के चलते विकसित देशों में संरक्षणवादी प्रवृत्ति जोर मार रही है। अमेरिका ने भारत के लिए बहुत से उत्पादों पर ऐसी रियायत को हटा दिया है। ऐसे में ईयू का यह फैसला भारतीय निर्यात के लिहाज से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ईयू ने पहले से चल रही इस स्कीम की समीक्षा के बाद नये स्वरूप में जारी किया है। ईयू यह स्कीम विकासशील देशों के लिए संचालित करता है। संशोधित स्कीम को जनवरी, 200से लेकर वर्ष 2011 के अंत तक जारी रखने की घोषणा की गई है। इसके तहत सबसे ज्यादा लाभ छह विकासशील देशों को दिये गये हैं जिनमें भारत भी शामिल है। इन देशों के निर्यात के लिहाज से अहम माने जाने वाले उत्पादों पर ईयू शुल्क दरों संबंधी रियायतें देगा। इस स्कीम को तकनीकी रूप से जनरलाइड सिस्टम ऑफ प्रिफरंसेस (ाीएसपी) कहा जाता है। इसके तहत डब्ल्यूटीओ सदस्यों के लिए लागू विशेष रियायती शुल्क दरों से भी ज्यादा की रियायतें शामिल होती हैं। इस बार में ईयू के व्यापार आयुक्त पीटर मंडेलसन ने कहा है कि जीएसपी को आगे जारी रखने से व्यापारिक साझीदारों को अपने संबंध मजबूत करने में सहूलियत होगी। ईयू ने कहा है कि इस स्कीम से भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यातकों को विशेष लाभ की उम्मीद की जा रही है। भारत ईयू को सालाना स्तर पर रत्न एवं आभूषणों का निर्यात लगभग 2.1 अरब यूरो करता है। वैसे भारत ईयू को सालाना लगभग 30 अरब यूरो के उत्पाद और लगभग 6 अरब यूरो का सेवा निर्यात करता है।

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