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भाजपा ने तय की वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी

भाजपा ने तय की वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी

आगामी लोकसभा और पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाने में जुटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संसदीय बोर्ड की बैठक में गुरुवार को पार्टी के सिपहसालारों की चुनाव कार्य संबंधी जिम्मेदारी तय की गई, हालांकि इनके नामों की औपचारिक घोषणा कल के लिए टाल दी गई।

पार्टी प्रमुख राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में लगभग दो घंटे चली बैठक में चुनावों के अलावा संसद के मानसून सत्र, देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार पार्टी की सर्वोच्च संस्था की बैठक में चुनावी रणनीति और तैयारियों को अमली जामा पहनाने के लिए कुछ समितियों के गठन को अंतिम रूप दिया गया है।

इन समितियों की बागडोर राष्ट्रीय महासचिवों के साथ साथ पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सौंपी जा रही है। इन नेताओं और समितियों के नामों की औपचारिक घोषणा कल की जायेगी। बैठक में वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा मेंविपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और केन्द्रीय चुनाव प्रचार अभियान समिति के प्रमुख नरेंद्र मोदी सहित बोर्ड के सभी सदस्यों ने बैठक में भाग लिया।

सूत्रों के अनुसार बैठक में लोकसभा और विधान सभा चुनावों केलिए जिन उप समितियों के गठन को अंतिम रूप दिया गया है उनमें चुनाव अभियान समिति, चुनाव संबंधी साहित्य तथा सामग्री और चुनाव घोषणा पत्र समिति प्रमुख हैं। यह पहला मौका है जब चुनाव के लिए महासचिवों के साथ साथ वरिष्ठ नेताओं को अलग से विशेष जिम्मेदारी दी जा रही है।

रिपोर्ट में यह कहा जा रहा है कि वरिष्ठ नेताओं को क्षेत्रवार जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि क्षेत्रवार जिम्मेदारी के बजाय उन्हें चुनाव से जुडे विशेष कामों की बागडोर सौंपी जायेगी। पार्टी की इस कवायद को सभी वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार बैठक में पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी को इस वर्ष के अंत में चुनाव में जाने वाले दिल्ली और राजस्थान का प्रभारी बनाने पर भी सहमति बनी है। पिछले दस दिनों में दूसरी बार हुई संसदीय बोर्ड की बैठक कोइसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ कई बैठकें हुई हैं।

आडवाणी, सिंह और पूर्व अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के बाद मोदी ने भी एक दिन पहले ही भागवत के साथ लंबी बैठक कर चुनाव के बारे में चर्चा की। मोदी और राजनाथ ने बुधवार को भी लगभग तीन घंटे तक चुनाव में नेताओं को जिम्मेदारियां तय करने के बारे में बैठकें कीं।

बैठक में संसद के आगामी मानसून सत्र पर भी विस्तार से चर्चा हुई और खाद्य सुरक्षा अध्यादेश, पेंशन तथा बीमा विधेयक और भूमि अधिग्रहण विधेयक के बारे में पार्टी की रणनीति के बारे में विचार-विमर्श किया गया।

पार्टी का कहना है कि वह संसद सत्र के दौरान देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति, आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा, उत्तराखंड आपदा, कुछ क्षेत्रों में एफडीआई की सीमा बढ़ाने, खुफिया तथा जांच एजेन्सियों के बीच तालमेल और भ्रष्टाचार से जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठायेगी।

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