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महिला बिल फिर ठंडे बस्ते में

लगता है कि महिला आरक्षण विधेयक एक बार फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा। इस विवादास्पद मुद्दे पर संसदीय समिति ने सर्वसम्मति बनाने के लिए और समय मांगा है। समिति के अध्यक्ष सांसद ई.एम.सुदर्शन नाच्चीप्पन ने राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी को लिखे पत्र में लिखा है कि उन्हें राजनीतिक पार्टियों के साथ विचार-विमर्श करने के लिए 60 दिन का समय दिया जाए। नाच्चीप्पन ने बताया कि राजग, जेडीयू, पीएमके तथा सपा अल्पसंख्यक व पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण मांग रहे हैं और इसके लिए उन्हें सभी पार्टियों की सहमति की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि कई सदस्य इस प्रस्ताव का अध्ययन करना चाहते हैं और उसके लिए समय बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। विधेयक में महिलाओं के लिए संसद और विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव है। लेकिन कई पार्टियों द्वारा कोटा के अंदर कोटा की मांग के कारण यह मामला अटका हुआ है। नए फामरूले के अंतर्गत समिति ने संविधान में संशोधन की मांग की है। समिति चाहती है कि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को आरक्षण देने के लिए राज्यों को अधिक शक्ितयां दी जानी चाहिए। विपक्षी भाजपा ने कहा है कि विधेयक को वर्तमान रूप में अपना समर्थन देगी। भाजपा का कहना है कि संप्रग सरकार को इसे संसद के मानसून सत्र में पारित कर देना चाहिए। वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यदि संप्रग सरकार विधेयक को संसद के मानसून सत्र में लाती है तो भाजपा उसका समर्थन करगी। नाच्चीप्पन ने बताया कि चुनाव आयोग ने 3 साल पहले कहा था कि सभी पार्टियां अपने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण करं। उनका कहना था कि 15 अगस्त के बाद संसद के सत्र की घोषणा किए जाने की संभावना है और हो सकता है कि वह सितंबर माह में हो।

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